एक ऐसा पन्ना जहाँ शब्द लिखे नहीं जाते, बल्कि महसूस किये जाते है। ज़िन्दगी की अनकही बातों को कहने की कोशिश है, जिन्हे हम अक्सर महसूस तो करते है। पर कह नहीं पाते। रिश्तों की उलझनें , समाज की उम्मीद ,दर्द, इंसानी भावनाओं की गहराई . तो आइये इस ब्लॉग ...थोड़ी देर रुकिए,पढ़िए और दिल से "बात " कीजिये।
बुधवार, 28 जनवरी 2026
जब मैं छोटी थी --मासूमियत से समझदारी तक का सफर
सोमवार, 19 जनवरी 2026
मुस्कराहट .......एक ख़ुशी
एक मुस्कान खुद के लिए । ....
ज़िंदगी भर दूसरों के लिए हर वक़्त जीके देख लिया।
अपनी हद्द में रह कर भी
हद से गुजर कर देख लिया।
न वो खुश हुए ,
ना कभी शुक्रगुजार हुए।
और शायद अब ये सवाल भी बेकार है।
गलती कहा रह गई।
इसलिए अब....
अब खुद से समझौता नहीं होगा।
अब अपनी चुप्पी को आदत नहीं बनने दूँगी।
हर बार की तरह खुद को आखरी नंबर पर नहीं रखूँगी।
बस खुश रहूँगी। .....
दुसरो को खुश करते करते
अगर खुद ही टूट जाएँ ,
तो इसे त्याग नहीं ,
खुद को खो देना कहते है...
खुद के लिए भी कुछ
पलों को जी लिया जाये,
एक मुस्कान...... खुद को,
भी दे कर जी लिया जाये।
जो किया, जिन के लिए किया
वो सब अपने है
कोई पराये नहीं
फिर भी कोई बढ़ाई नहीं। ..
कभी तो कुछ ख़ुशी
दूसरों से भी महसूस हो
कुछ अपने करने की। .............. ?
अब सब कुछ नहीं बदलूंगी ,
पर इतना ज़रूर बदलूँगी। .....
कोई एहमियत दे या न दे। .
मैं खुद को एहमियत ज़रूर दूँगी।
न किसी को परेशान करने की इत्छा
न खुद परेशान होना है।
आज से ,
एक मुस्कान। ....
खुद के लिए।
शुक्रवार, 16 जनवरी 2026
"एक नयी शुरुआत.... चल ऐ ज़िन्दगी, फिर से जीते है..."
🍃एक नयी शुरुआत... चल फिर से जीते हैं
"ऐ ज़िन्दगी"
कुछ कहानियां शोर मचा कर नहीं आती...
वो चुपचाप ज़िन्दगी के किसी कोने में जनम लेती है
और धीरे धीरे हमे और मज़बूत बना देती है.
एक नयी शुरुआत करने का मन है.
फिर से कुछ एहसासो, कुछ नए विचारों को साथ ले कर,
खुद को स्ट्रांग बनाने की कोशिश कर रहीं हूँ।
जाने क्यों...
शयद इसलिए, क्यूंकि रुक-- रुक कर,
जीना खुद को थका देता है।
या ....फिर इसलिए ,क्यूंकि अब हार मान लेना,
दिल को मंजूर नहीं होता।
बहुत बार लगा, की बस यही रुक जाऊ ।
पर हर बार ज़िन्दगी ने मुझे आगे बढ़ना सिखाया।
ज़िन्दगी चलने का नाम है।
रुकना तो फिर वैकुंठ धाम है।
यह बात समझ आते ही ,
अंदर कहीं कुछ बदलने लगता है।
दिल से एक आवाज़ उठती है---
"चल ऐ ज़िन्दगी...
आज एक बार खुलकर
फिर से जीते है"।
ना पूरी तैयारी के साथ,
न ही हर जवाब हाथ में लेकर
बस इतनी सी हिम्मत के साथ
की जो भी सामने आये ,
उसका सामना मुस्कुरा कर किया जाये।
बस अब यही जीना है।
और शायद... यही
"मेरी नयी और सही शुरुआत"। .......