"गणेश चतुर्थी: 2026....जब बप्पा घर नहीं, दिल में आते हैं"
गणेश चतुर्थी: जब बप्पा घर नहीं, दिल में आते हैं आस्था, विश्वास और उन अनकही प्रार्थनाओं का पर्व, जिन्हें शब्दों की ज़रूरत नहीं होती गणेश चतुर्थी आते ही ऐसा लगता है जैसे घर के किसी अपने के आने की तैयारी हो रही हो। घर की सफ़ाई होती है, रंगोली सजती है, फूल आते हैं, मोदक बनते हैं… और फिर इंतज़ार होता है उस पल का— “बप्पा घर आ गए…” लेकिन क्या सचमुच गणपति केवल मूर्ति के रूप में हमारे घर आते हैं? शायद नहीं। वह तो उस दिन भी आते हैं जब कोई बहुत परेशान होकर कहता है— “अब आप ही संभाल लेना, बप्पा…” वह उस माँ के पास भी आते हैं जो अपने बच्चे के भविष्य के लिए चुपचाप प्रार्थना करती है। उस बेटी के पास भी जो अपने माता-पिता की चिंता अपने मन में छुपाए रहती है। उस इंसान के पास भी जो बाहर से बिल्कुल ठीक दिखाई देता है, लेकिन भीतर से बहुत थका हुआ है। और शायद सबसे ज़्यादा वह उन दिलों में आते हैं जहाँ बहुत कुछ कहने को होता है, मगर शब्द साथ छोड़ देते हैं। यही तो गणेश चतुर्थी की सबसे सुंदर बात है— बप्पा से बात करने के लिए बहुत बड़े शब्द नहीं चाहिए। बस एक सच्चा मन चाहिए। गणेश चतुर्थी केवल ...