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"माँ सिद्धिदात्री :पूर्णता और शक्ति का आशीर्वाद"

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9th नवरात्रा — माँ सिद्धिदात्री :--- पूर्णता और शक्ति का आशीर्वाद नवरात्रा का आखिरी दिन… एक अलग ही एहसास लेकर आता है। जैसे एक लंबी यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच रही हो… और मन में एक अजीब सा सुकून उतर रहा हो। नौ दिनों की भक्ति… नौ दिनों का संयम… नौ दिनों का आत्मचिंतन… आज आकर जैसे पूर्ण हो जाता है। 9th नवरात्रा माँ सिद्धिदात्री को समर्पित है— वो रूप… जो पूर्णता, शक्ति और सिद्धि का प्रतीक है। यह दिन केवल पूजा का नहीं… बल्कि अपने अंदर छुपी शक्ति को पहचानने का दिन है। माँ सिद्धिदात्री का अर्थ — पूर्णता का वरदान "सिद्धिदात्री" शब्द दो शब्दों से बना है— सिद्धि + दात्री अर्थात— वो जो सिद्धियाँ देने वाली हो। शास्त्रों में बताया गया है कि माँ सिद्धिदात्री अपने भक्तों को— सफलता शक्ति ज्ञान बुद्धि आत्मविश्वास और जीवन में पूर्णता का आशीर्वाद देती हैं। लेकिन एक गहरी बात जो अक्सर हम समझ नहीं पाते— माँ हमें बाहर से कुछ नया नहीं देती… बल्कि हमारे अंदर जो पहले से है, उसे पहचानने की शक्ति देती है। क्योंकि— अधूरा इंसान नहीं होता… अधूरी होती है उसकी पहचान। पौराणिक कथा — जब माँ ने शिव को पूर्...

आओ बात करे :शिवरात्रि और मन के अँधेरे की

 शिवरात्रि पर स्पेशल:-- "हे भोले बाबा, मेरे भोले नाथ ,  तीनो लोक में  तू ही तू."..  जब दुनिया के शोर में मन अपनी आवाज़ खो देता है, तब शिव का नाम ही है जो हमे वापस खुद से मिलता है।  शिवरात्रि सिर्फ एक त्यहार नहीं, ये एक अंतर-यात्रा है--- जहा हम अपनी कमज़ोरी, अपना दर्द, अपनी थकान  भोले नाथ के चरणों में अर्पण कर  देते है। जब शिव के साथ माँ पार्वती  होती है तो  भक्ति में शक्ति और शक्ति में  करुणा जुड़ जाती है  शिव का अर्थ: विनाश नहीं निर्माण है   अक्सर लोग शिव को विनाश का देवता  कहते हैं,पर सच ये है,   शिव विनाश नहीं परिवर्तन  है।  जो गलत है उसे तोडना ,जो सच है उसे बचाना,  ये शिव का स्वरुप है :- शिव:"  वो शून्य है जहाँ से सब शुरू होता है. और वो स्थिरता है जहा सब ठहर जाता है," जब जीवन में सब कुछ उलझा हुआ लगता है  तब शिव हमे सिखाते है - सब कुछ पकड़ने से नहीं , बल्कि छोड़ने से मिलता है।  माँ  पार्वती  : शक्ति जो संभाल लेती है  अगर शिव तपस्या है  तो पार्वती   समर...