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माँ — हर धड़कन में बसने वाला एहसास--

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           HAPPY MOTHER'S DAY..... माँ — हर धड़कन में बसने वाला एहसास माँ प्रेम और त्याग की सबसे बड़ी मिसाल होती है। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है। एक ऐसा नाम, जिसे लेते ही दिल को सुकून मिलता है, आँखों में नमी आ जाती है और होंठों पर अनजानी सी मुस्कान आ जाती है। माँ वह है, जो खुद अधूरी रहकर हमें पूरा बनाती है। जो अपने हिस्से की खुशियाँ चुपचाप हमारे नाम कर देती है। जो हमारी हर खामोशी को बिना कहे समझ लेती है। जब हम छोटे थे, तो हमें लगता था कि माँ बस हमारे लिए खाना बनाती है,  स्कूल भेजती है, डाँटती है, प्यार करती है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, समझ आया— माँ सिर्फ ये सब नहीं करती, माँ तो हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा भूलकर हमें याद रखती है। माँ का हर पल — एक अनकही कहानी सुबह सबसे पहले उठने वाली माँ ही होती है। घर के हर कोने में उसकी आहट होती है। रसोई में चाय की खुशबू, मंदिर में धीमी सी घंटी, और हमारे कमरे के बाहर उसकी पुकार— “उठ जाओ बेटा, देर हो जाएगी…” उसकी आवाज़ में ALARM नहीं, अपनापन होता है। हम कभी सोचते भी नहीं कि जो हाथ ...

माँ: ममता, शक्ति और जीवन का आधार

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 माँ -जो  लिखते ,सोचते, ऐसा एहसास ---  "जिसे शब्दों में बयान करना  भगवान के लिए भी मुश्किल होगा " माँ का संधि-विच्छेद ,सामान्य रूप से नहीं किया जा सकता।  म--ममता की मिटटी , आ से आशीष का आकाश   और इन दोनों में सांस की कोमलता (चन्द्रबिन्दु) घुलती  है तब बनता है" माँ" । .... माँ----  तू ज्ञान है, तू ध्यान है, तू अम्बर सी महान है।  तू मोल है, अनमोल है, तू शांत भी... तू ही बोल है।  तू आरम्भ है तू अनंत है  तू ज़िन्दगी का स्तम्भ है .... तू राज है.... तू विस्तार है  तू ही तो जीवन का आधार है ।  "माँ " ... शब्द छोटा है ,अर्थ असीम है  इस एक शब्द में पूरा संसार समाया  है।  जब कोई बच्चा पहली बार माँ कहता है, तो लगता है जैसे दुनिया की सबसे पवित्र ध्वनि  धरती पर उत्तर आयी हो।  तू वह शक्ति है , जो बिना कहे समझ जाती है  तू वह दृष्टि  है, जो बिना  कहे ,सब दिल से देखती है ko तू ज्ञान है ,क्युकी जीवन के सब से बड़े पाठ   किताबों से नहीं ,तेरी गोद से  मिलते है. तू ध्यान है क्यों की जब...

माँ तो बस माँ है...माँ का प्यार: एक एहसास जो शब्दों से परे है

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माँ तो बस माँ है… शब्द छोटा, संसार बड़ा           " HAPPY MOTHER'S DAY" एक एहसास… एहसास है प्यार का, प्यार का दुलार का, दुलार संसार का— क्योंकि संसार ही माँ है… CHAPTER – 5 : माँ… एक शब्द नहीं, एक संसार है माँ सुबह की पहली किरण है, जो खिड़की में नहीं, दिल में उतरती है। माँ एक आवाज़ है— जो नाम लेकर नहीं बुलाती, फिर भी सबसे गहराई तक पहुँच जाती है। माँ वह स्पर्श है— जो माथे पर हाथ रखते ही हर उलझन सुलझा देता है। माँ धूप भी है, छाँव भी है, थकान भी है, आराम भी है। माँ रसोई की खुशबू में घुली हुई दुआ है, दरवाज़े पर टिका इंतज़ार का सब्र है। माँ की आँखों में नींद कम होती है, चिंता ज़्यादा। माँ की थाली में रोटी कम पड़ जाए, पर हमारे हिस्से की कभी कम नहीं होती। माँ की हथेलियों की लकीरों में हमारी किस्मत बसती है, और उसकी झुर्रियों में हमारे बड़े होने की कहानी लिखी होती है। माँ वह ताकत है जो हमारे हिस्से का दर्द छुपाकर हमें हिम्मत देती है। वह दीवार है— जो खुद दरकती है, पर घर को टूटने नहीं देती। वह दीपक है— जो खुद जलता है, पर उजाला हमें देता है। माँ की गोद—दुनिया का सबसे सुरक्ष...