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"प्रार्थना क्या है?:-- क्यों , कब और किससे की जाती है"?

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  प्रार्थना क्या है?  आओ बात करें ....जो की 100 % हमारे विश्वास से जुडी है.. क्यों की जाती है, कब की जाती है, और किससे की जाती है? ( प्रार्थना ) मनुष्य जब स्वयं को बहुत कमजोर महसूस करने लगता है… जब जीवन के बोझ उसके कंधों से भारी हो जाते हैं… जब रिश्तों की आवाज़ें भी भीतर के शोर को शांत नहीं कर पातीं… तब वह प्रार्थना करता है। और कभी-कभी… जब वही मनुष्य खुद को बहुत शक्तिशाली समझने लगता है… जब उसके भीतर अहंकार धीरे-धीरे जन्म लेने लगता है… जब उसे लगता है कि सब कुछ उसी के कारण है… तब भी उसे प्रार्थना की आवश्यकता होती है। क्योंकि प्रार्थना केवल माँगना नहीं है। प्रार्थना वह पुल है … जो इंसान को उसके अहंकार से हटाकर विनम्रता तक ले जाता है। जो डर से निकालकर विश्वास तक पहुँचाता है। जो “मैं” से हटाकर “हम” तक ले जाता है। प्रार्थना क्या है? — आत्मा की मौन भाषा प्रार्थना शब्दों का खेल नहीं है। यह किसी विशेष भाषा, धर्म, मंदिर, मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे तक सीमित नहीं है। प्रार्थना वह भाव है… जो बिना बोले भी ईश्वर तक पहुँच जाता है। एक माँ का अपने बच्चे के लिए रात भर जागना भी प्रार्थना है। किसी...