"आखिर क्यों औरत बेचारी है? सीता (त्रेता युग ) ,द्रोपदी (द्वापरयुग )और आज के युग की सच्चाई "
आखिर क्यों वो “बेचारी” है? वो माँ है… वो बेटी है… वो बहन है… वो पत्नी है… वो भाभी है… वो “तुम्हारी” है… फिर भी… वो “बेचारी” क्यों है? कभी सोचा है…? हम हर रिश्ते में उसे अपनाते हैं, हर नाम से पुकारते हैं… पर जब बात आती है सम्मान की , तो वही औरत अचानक “बेचारी” बन जाती है। ये “बेचारी” शब्द… किसी एक औरत का नहीं, पूरी सोच का अपमान है। 🔥 सोच जो डुबो रही है… हम कहते हैं — “औरत कमजोर है…” “उसे सहना चाहिए…” “घर बचाने के लिए चुप रहना चाहिए…” यही सोच… धीरे-धीरे हमें अंदर से खोखला कर रही है। क्योंकि जब हम एक औरत को “बेचारी” कहते हैं, हम उसकी ताकत को नकार देते हैं। हम उसकी आवाज को दबा देते हैं। हम उसके दर्द को सामान्य बना देते हैं। 🌊 गंगा की बेटी पूछेगी… एक दिन… वो गंगा की बेटी उठेगी और पूछेगी— “क्यों तड़पती रही सीता?” “क्यों दांव पर लगाई गई द्रौपदी?” “क्यों हर युग में नारी ही परीक्षा देती रही?” क्या हमारे पास जवाब होगा…? या हम फ...