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"कामयाबी की परिभाषा --- दूसरों की नज़रों में....V/S..... अपनी नज़रों में"

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  "दूसरों की परिभाषा से बाहर निकलकर अपनी  कामयाबी की परिभाषा लिखना" खामोश कलम "बेटा, कुछ बनकर दिखाना।" शायद यह वाक्य हम सबने कभी न कभी सुना है। लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि "कुछ बनना" आखिर होता क्या है? क्या बड़ा घर होना कामयाबी है? क्या बैंक बैलेंस का बढ़ना कामयाबी है? क्या नाम, शोहरत और पहचान ही सफलता का अंतिम पड़ाव हैं? या फिर... कामयाबी की परिभाषा:-- हर इंसान के लिए अलग हो सकती है? बचपन से हमें एक ऐसी दौड़ में शामिल कर दिया जाता है, जिसका रास्ता तो सबको दिखाया जाता है, लेकिन मंज़िल चुनने का अधिकार बहुत कम लोगों को मिलता है। हमें बताया जाता है कि अच्छे नंबर लाओ, अच्छी नौकरी पाओ, खूब पैसा कमाओ और फिर दुनिया तुम्हें सफल कहेगी। धीरे-धीरे हम दुनिया की परिभाषा को अपनी परिभाषा समझ बैठते हैं। और यहीं से कहानी बदल जाती है। क्योंकि हम अपनी खुशी को महसूस करने के बजाय, दूसरों की नज़रों में खुद को तलाशने लगते हैं। कामयाबी आखिर किसकी है? एक किसान सुबह खेत में जाता है। शाम को लौटकर अपने परिवार के साथ बैठकर खाना खाता है। वह मुस्कुरा रहा है। दूस...