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"चाय की प्याली, सावन और तुम … कुछ अधूरी सी यादें"

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  चाय की प्याली, सावन और तुम… मैं  चाय की प्याली लेकर बैठी थी … शाम खामोश थी, मगर मौसम कुछ कह रहा था। बारिश की बूंदें खिड़की पर धीरे-धीरे दस्तक दे रही थीं… और चाय की गर्माहट जाने कहाँ लिखने लगी। चाय से उठता हुआ धुआँ… खामोशी से किसी की तस्वीर बनाने लगा। जैसे किसी ने यादों को धीरे से हवा में घोल दिया हो। और मैं भी उस तस्वीर में उतरती चली गई… वो चेहरा साफ तो नहीं था, मगर एहसास बहुत अपना सा था। जैसे सावन की बारिश में भीगा कोई अधूरा सपना… जो कभी पूरी तरह मिला नहीं, पर दिल से कभी गया भी नहीं। चाय ठंडी होती रही… और मैं उन धुएँ की लकीरों में किसी की बातें ढूँढती रही। सावन का मौसम  :--शायद इसलिए भी इतना खूबसूरत होता है, क्योंकि ये इंसान को उसके सबसे सच्चे एहसासों से मिलवा देता है। बारिश जब धीमे-धीमे गिरती है, तो दिल भी अपनी आवाज़ थोड़ा साफ सुनने लगता है। उस शाम भी कुछ ऐसा ही था… ना कोई शोर, ना कोई भीड़, बस बारिश, चाय… और कुछ अधूरी सी यादें। कभी-कभी जिंदगी में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका नाम नहीं होता… मगर असर पूरी जिंदगी पर रहता है। वो लोग भले पास ना हों, पर हर बारिश में महसूस ...