माँ: ममता, शक्ति और जीवन का आधार
माँ -जो लिखते ,सोचते, ऐसा एहसास --- "जिसे शब्दों में बयान करना भगवान के लिए भी मुश्किल होगा " माँ का संधि-विच्छेद ,सामान्य रूप से नहीं किया जा सकता। म--ममता की मिटटी , आ से आशीष का आकाश और इन दोनों में सांस की कोमलता (चन्द्रबिन्दु) घुलती है तब बनता है" माँ" । .... माँ---- तू ज्ञान है, तू ध्यान है, तू अम्बर सी महान है। तू मोल है, अनमोल है, तू शांत भी... तू ही बोल है। तू आरम्भ है तू अनंत है तू ज़िन्दगी का स्तम्भ है .... तू राज है.... तू विस्तार है तू ही तो जीवन का आधार है । "माँ " ... शब्द छोटा है ,अर्थ असीम है इस एक शब्द में पूरा संसार समाया है। जब कोई बच्चा पहली बार माँ कहता है, तो लगता है जैसे दुनिया की सबसे पवित्र ध्वनि धरती पर उत्तर आयी हो। तू वह शक्ति है , जो बिना कहे समझ जाती है तू वह दृष्टि है, जो बिना कहे ,सब दिल से देखती है ko तू ज्ञान है ,क्युकी जीवन के सब से बड़े पाठ किताबों से नहीं ,तेरी गोद से मिलते है. तू ध्यान है क्यों की जब...