मंगलवार, 17 मार्च 2026

आओ बात करे....बस बात ....मेरी नन्ही परी ने जब ये नाम दिया

 CHAPTER -4

आओ बात करे .....बस बात

हाँ, आप से ही कह रही हूँ ... 

 आइये ..... ज़रा बैठिये।

कोई जल्दी नहीं  है। ...

बस कुछ लम्हे.......

जो शयद हम रोज़ सोचते है

 पर  कह नहीं  पाते। ..

(आओ... बात करें.....बस बात) 

ये  लफ्ज़ , मैंने कही से चुराए नहीं 

ये शब्द .......जब मेरी बेटी २ साल की थी,

 तब वो मेरी ऊँगली पकड़ कर ,

पास बैठा लेती थी और बोलती 

मम्मी...... "आओ ना ... बात करें" ....और 

 मैं सब काम छोड़ कर उससे बात करती थी


न उसे कोई कहानी  चाहिए थी,

 न ही कोई सवाल। .....

बस मेरा होना काफी था, 

कोई अपना जो साथ हो  

बिना कहे समझने  वाला........

बच्चों को वक़्त देना बहुत ज़रूरी है, 


कुछ भी लौट कर नहीं आता ,लेकिन जब अपने बच्चे ,

सामने होते है तो जैसे बचपन फिर से लौट आता हैं।

 जब भी वक़्त बच्चो के साथ मिले उसे पूरा enjoy कीजिये 

एक बार उनके साथ बच्चा बन कर देखिये, 

"सब काम एक तरफ... वो पल"....


लेकिन आज के इंसान की सबसे बड़ी  सच्चाई यही है कि 

इतनी बड़ी CONTACT LIST पर बात है....

पर CONNECTION ZERO....

सब के नंबर PHONE में हैं ... पर दिल के पास कोई  नहीं ,


कभी कभी बात करने का मन होता है 

पर उस CONTACT LIST में  कोई नह ी होता, 

जिसे बिना सोचे हम बात कर  ले....


क्यों? ...आख़िर  क्यों? .....

आखिर हम इतने व्यस्त कहा होते जा रहे? 

जो रिश्तों को खोते जा रहे....


आज लोग ONLINE बहुत हैं 

पर AVAILABLE नहीं।।।।।


STATUS लगा लेंगे ,

REEL पर दिखाई  देंगे ,

पर कॉल आ जाये ,तो मन कहता है...

अभी बात नह करनी .....


जब  नार्मल बात नहीं होती,

 फिर जो होती है ।

वो होती है थकान  की...ख़ामोशी की...

अंदर भरी हुई बातो की(भीड़).....

और ये वो बाते है, जो हर किसी से नह ी  होती।।।।


इसलिए इंसान अकेला नहीं होता ,

बस थका होता है 

कर वक़्त STRONG बन  कर ,

समझ समझ कर, 

चुप रह कर, 

शयद इसीलिए फ़ोन हाथ में होते हुए भी,

 डायल करने का मन नहीं होता .

और फिर वही अकेलेपन ......


 "क्यों ना.... इसलिए अकेलेपन से ही जीत लिए जाये।।।

खुद को "

आओ बात करे। .. 

खुद के भरोसे को वापिस लाये। .. "मैं खुद ही हु। ..जो भी हूँ "


ना कोई और है... ना ही हो सकता है 

ये बात किसी और को नहीं खुद को बताने है 

आओ प्यार करे......  

खुद से ......

आओ इंतज़ार करे खुद का..

आखिर .... हम कब खुद के लिए खुद को फ्री कर पाएंगे .

(आओ... बात करें.....बस बात) .........

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