होली .....
होली में रंग,
रंग में तरंग,
तरंग में उमंग ,
उमंग तेरे प्यार की ,
प्यार की फुहार की,
फुहार है बहार की ,
बहार इंतज़ार की ,
इंतज़ार उस पल का,
पल में इकरार का,
इकरार दिल-ए -यार का,
यार के एतबार का।
ऐतबार की बात में,
बात की हर सांस में,
सांस के हर राग में,
राग की मिठास में,.
मिठास मुस्कान की,
मुस्कान अरमान की,
अरमान उड़ान की,
उड़ान आसमान की,
आसमान नीला है,
नीली तो पतंग है,
पतंग संग डोर है,
डोर है हवाओं में
हवा में तेरा नशा ,
नशे की वो घडी,
घडी जो ठहरी ज़रा ,
ठहरी सी वो नज़र ,
नज़र में तेरा असर ,
असर से भीगा मन ,
मन में शयाम रँग।
श्याम रंग जो चढ़ गया ,
दुनिया से तर गया ,
तर के वो किधर गया,
किधर का ही सवाल है,
सवाल बेमिसाल है,
बेमिसाल जोश है
जोश मदहोश है,
मदहोश सी वो चाल है,,
चाल मस्तानी है,
मस्तानी ,जवानी है,
जवानी की कहानी है,
कहानी तो पुरानी है
पुरानी बात छोड़ दो ,
छोड़ना तो स्वार्थ है,
स्वार्थ का क्या अर्थ है,
अर्थ तो व्यर्थ है,
व्यर्थ ही समर्थ है,
समर्थ ही तो होना है ,
होना तो विश्वास है,
विश्वास रब के साथ है,
रब ही तो अंदर है,
अंदर एक समंदर है,
समंदर में तो पानी है ,,
पानी में रवानी है,
रवानी " वह क्या बात है
बात तो एक बोली है
बोली तो बस" होली है "
"होली रे होली "
प्यार भरी ,सम्मान भरी ,विश्वास भरी। ..रंग भरी। ............
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