ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सफर…जब बच्चे जवान हो जाएं…

🌿 “जब बच्चे जवान हो जाएं…”

जब बच्चे जवान हो जाएं…
तो बुढ़ापे (
माँ-बाप )के कदम किधर जाएं…

ढूंढी थी राहें उनको चलना सिखाने की…
वो तो उड़ गए… phurrrrr
से....
अब हम किधर जाएं…

ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सफर

शायद वही होता है…

जब हम अपने बच्चों को
अपनी उंगली पकड़कर चलते हुए देखते हैं…

उनके पहले कदम…

पहली मुस्कान…
पहली बार “माँ” या “पापा” कहना…

इन लम्हों में ही…

हम अपनी पूरी ज़िंदगी जी लेते हैं…

हम उन्हें चलना सिखाते हैं…

गिरने से बचाते हैं…
हर मुश्किल से पहले खुद खड़े हो जाते हैं…

धीरे-धीरे…

वो बड़े होने लगते हैं…

और हम…

 उन्हें और ऊँचा उड़ना सिखाने लगते हैं…

कभी सोचा नहीं था…

कि एक दिन…

    वही उड़ान…
हमसे दूर ले जाएगी…

वो तो उड़ गए…

phurrrr ...से…

अब घर वही है…

दीवारें वही हैं…

पर आवाज़ें बदल गई हैं…

पहले जहाँ हर कोने में

उनकी हँसी गूंजती थी

आज…
     वही कोने खामोश हो गए हैं…


किचन में बनता खाना अब भी वही है…
पर किसी की ज़िद नहीं होती…

मुझे ये नहीं खाना…”


कमरे अब भी सजे हुए हैं…
पर उनमें वो बिखराव नहीं है…
जो कभी ज़िंदगी का हिस्सा था…

और तब…
दिल के किसी कोने से एक सवाल उठता है—

  “अब हम किधर जाएं…?”(माँ-बाप )


जिस ज़िंदगी को हमने
सिर्फ बच्चों के इर्द-गिर्द बुना था…

आज वही ज़िंदगी…
जैसे खुद से सवाल कर रही है…


क्या हमारा सफर…
बस यहीं तक था…?

शायद नहीं

क्योंकि…
बच्चों को उड़ना सिखाना…

     हमारा कर्तव्य था…

और उनका उड़ जाना…

     उनकी ज़िंदगी है…

लेकिन…

इस सच्चाई को स्वीकार करना…

    दिल के लिए आसान नहीं होता


कभी-कभी…
हम खुद को खाली सा महसूस करते हैं…

जैसे…
कोई बहुत बड़ा हिस्सा…
हमसे अलग हो गया हो…

पर क्या सच में…
हम अकेले हो गए हैं…?

या फिर…
ये वो वक्त है…

     जब हमें खुद को फिर से ढूंढना है…


शायद…
ज़िंदगी हमें एक और मौका दे रही है…

    खुद के लिए जीने का…


वो सपने…
जो हमने कभी अपने लिए देखे थे…

वो शौक…
जो ज़िम्मेदारियों के नीचे दब गए थे…

शायद अब वक्त है…
उन्हें फिर से जीने का…


जब बच्चे जवान हो जाएं…

तो शायद…
     बुढ़ापे के कदम
रुकते नहीं…

बल्कि…
एक नई राह ढूंढते हैं…


एक ऐसी राह…
जहाँ हम खुद से मिल सकें…

जहाँ हम अपने अंदर के उस इंसान को
फिर से पहचान सकें…


khamosh kalam

अगर आज आपको लगता है…
कि आपके बच्चे दूर हो गए हैं…

और आप सोच रहे हैं—

👉 अब हम किधर जाएं…?”(माँ-बाप )


तो एक बार…
खुद की तरफ देखिए…

क्योंकि…

    “शायद ज़िंदगी अब आपको…
आपसे मिलवाना चाहती है…”


और याद रखिए…

      बच्चे दूर नहीं होते…
बस… अपनी दुनिया बनाने चले जाते हैं…

और हम…
    अब भी उनके दिल में…
उतनी ही जगह रखते हैं… ❤️


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