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“मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।”:--- मन की स्थिति

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  मन के हारे हार है, मन के जीते जीत परमात्मा को पाइए मन ही के प्रतीत" मन के हारे हार है, मन के जीते जीत" संत कबीरदास जी का एक प्रसिद्ध दोहा है, जिसका अर्थ है कि जीत और हार हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है । यदि आप मन में हार स्वीकार कर लेते हैं, तो आप हार जाते हैं, और यदि मन में जीत का निश्चय कर लेते हैं, तो सफल होते हैं। यह कहावत आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को सबसे महत्वपूर्ण मानती है मन… एक ऐसा शब्द, जो छोटा है, लेकिन इसकी गहराई पूरी जिंदगी को दिशा दे देती है। इंसान बाहर से जितना भी मजबूत क्यों न दिखे, उसकी असली ताकत उसके मन की स्थिति पर निर्भर करती है। यही वजह है कि कहा गया है— “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।” लेकिन सवाल ये है कि जब मन ही चंचल हो, डगमगाता रहे, कभी इधर तो कभी उधर भागता रहे… तब जीत कैसे मिले? 🧠 मन की चंचलता — असली युद्ध भीतर है मन का स्वभाव ही चंचल है। वो कभी अतीत में जाता है, कभी भविष्य की चिंता में उलझ जाता है। कभी कहता है: “तुम नहीं कर पाओगे” कभी कहता है: “कल से शुरू करेंगे” कभी डराता है: “अगर असफल हो गए तो?”       यही च...

माँ कालरात्रि : अंधरे से लड़ने की असली शक्ति

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माँ कालरात्रि : अंधरे से लड़ने की असली शक्ति  कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है… जहाँ हर तरफ बस अंधेरा ही अंधेरा दिखाई देता है… ना कोई रास्ता समझ आता है… ना कोई सहारा महसूस होता है… ऐसे ही समय में… Navratri का सातवां दिन हमें याद दिलाता है… माँ कालरात्रि-  का वो रूप…  जो अंधकार को खत्म करने के लिए ही प्रकट हुआ था…  माँ कालरात्रि  का स्वरूप थोड़ा डरावना जरूर लगता है… लेकिन उनके इस रूप के पीछे छुपा हुआ है एक गहरा सच — कि हर अंधेरे को खत्म करने के लिए, कभी-कभी हमें खुद भी कठोर बनना पड़ता है… उनका काला रंग… उनकी तेज आंखें… उनका प्रचंड रूप… ये सब हमें डराने के लिए नहीं… बल्कि ये सिखाने के लिए है कि: 👉 “अंधेरे से डरना नहीं… बल्कि उसका सामना करना सीखो…” ज़िंदगी में कई बार ऐसा होता है… जब हम खुद को टूटता हुआ महसूस करते हैं… जब अपनों से ही चोट मिलती है… जब हालात हमारे खिलाफ खड़े हो जाते हैं… और सबसे ज्यादा दर्द तब होता है… जब हम सही होते हुए भी… गलत साबित कर दिए जाते हैं… ऐसे ही समय में… दिल के किसी कोने में एक डर बैठ जाता है… “अब क्य...