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आओ बात करे---चकमक पत्थर से कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI ) तक

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आओ बात करें — सोच बदलने से क्या बदलेगा? chapter --6   आजकल हम अक्सर एक वाक्य सुनते हैं— “सोच बदलो, समाज बदलेगा।” यह बात सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन कभी-कभी मन में एक सवाल भी उठता है— आख़िर समाज को बदलने की ज़रूरत क्यों है? क्या हमारे माता-पिता और बुजुर्गों की सोच गलत थी? क्या वे कम समझदार थे? उन्होंने वही सिखाया  जो उन्हें सही लगा, क्योंकि उनका उद्देश्य हमेशा हमारा भला ही था।             तो फिर आज हर जगह सोच बदलने की बात क्यों की जा रही है? बदलाव का मतलब विरोध नहीं होता सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सोच बदलने का मतलब अपने बुजुर्गों को गलत साबित करना नहीं होता। असल में बदलाव का मतलब है— समझ का विस्तार। समय बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं और इंसान के सामने नई चुनौतियाँ आती हैं। ऐसे में सोच का विकसित होना स्वाभाविक है। सोच के विकास को समझने के लिए एक उदाहरण अगर हम पुराने समय को देखें, तो लोग चकमक पत्थर से आग जलाते थे। फिर समय बदला और माचिस का आविष्कार हुआ। इसके बाद लाइटर आया, जिसने आग जलाना और आसान बना दिया। आज के दौर में तो इलेक्ट्रिक उपकरण...