संदेश

सोच खुद की ख़ुशी की लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"मुस्कराहट .....एक ख़ुशी, एक मुस्कान खुद के लिए , क्यों ?"

चित्र
  एक मुस्कान खुद के लिए                      ज़िन्दगी भर हमने हर वक्त दूसरों के लिए जीना सीखा। उनके लिए ख़ुशियाँ, उनके लिए फैसले, उनके लिए सहन करना। अपनी हदों में रहकर भी हमने अपनी हदें पार की, ताकि सब खुश रह सकें अपनी भावनाओं को दबाया, अपनी ज़रूरतों को अनदेखा किया—बस यह सोचकर कि शायद यही ज़िन्दगी है। और फिर भी—न कभी उन्हें खुशी मिली, न कभी उन्होंने शुक्र अदा किया।  लेकिन अब… अब यह सवाल भी बेकार लगने लगा है। अब वक्त है, अपनी मुस्कान, अपनी खुशियाँ, अपनी ज़िन्दगी खुद के लिए जीने का। "दिल में तूफ़ान हो गया बरपा , कई बार ज़िन्दगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहाँ बाहर सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर एक ऐसा तूफ़ान उठ चुका होता है जिसे कोई देख नहीं पाता। वर्षों तक दूसरों के लिए जीते-जीते इंसान अपनी ही पहचान से दूर होता चला जाता है। उसे यह भी याद नहीं रहता कि उसकी अपनी इच्छाएँ क्या थीं, उसके अपने सपने कौन से थे और उसकी मुस्कान आख़िरी बार बिना किसी वजह के कब आई थी।  तुमने जो मुस्कुरा के देख लिया"  ...