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नवरात्रे का चौथा दिन...माँ कूष्माण्डा की शक्ति और जीवन में उनका महत्व

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🌺 नवरात्रि का चौथा दिन – माँ कूष्मांडा: एक मुस्कान से सृजन करने वाली शक्ति नवरात्रि का हर दिन अपने आप में एक अलग ऊर्जा, एक अलग एहसास लेकर आता है… और चौथा दिन… कुछ खास है… कुछ अलग है… ये दिन समर्पित है माँ कूष्मांडा को… वो माँ… जिन्होंने एक हल्की सी मुस्कान से इस पूरे ब्रह्मांड का सृजन कर दिया… सोचिए… जहाँ कुछ भी नहीं था… न रोशनी… न अंधेरा… न कोई दिशा… वहाँ सिर्फ एक मुस्कान से… इतना विशाल संसार बन गया… कितनी अद्भुत है ये शक्ति… ✨ माँ कूष्मांडा – सृजन की ऊर्जा माँ कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता कहा जाता है… उनकी मुस्कान में इतनी शक्ति है कि वो अंधकार को भी उजाले में बदल सकती हैं… वो हमें सिखाती हैं… कि हर शुरुआत के लिए बड़े कदम नहीं… बस एक छोटी सी सकारात्मक सोच… एक मुस्कान ही काफी है… नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा की पूजा की जाती है। कुष्मांडा का अर्थ है 'कद्दू' (कुम्हड़ा), जो ऊर्जा का प्रतीक है। मान्यता है कि जब सृष्टि में अंधकार था, तब देवी ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें 'ब्रह्मांड की माता' कहा जाता है। ...

"मुस्कराहट .....एक ख़ुशी, एक मुस्कान खुद के लिए , क्यों ?"

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  एक मुस्कान खुद के लिए                      ज़िन्दगी भर हमने हर वक्त दूसरों के लिए जीना सीखा। उनके लिए ख़ुशियाँ, उनके लिए फैसले, उनके लिए सहन करना। अपनी हदों में रहकर भी हमने अपनी हदें पार की, ताकि सब खुश रह सकें अपनी भावनाओं को दबाया, अपनी ज़रूरतों को अनदेखा किया—बस यह सोचकर कि शायद यही ज़िन्दगी है। और फिर भी—न कभी उन्हें खुशी मिली, न कभी उन्होंने शुक्र अदा किया।  लेकिन अब… अब यह सवाल भी बेकार लगने लगा है। अब वक्त है, अपनी मुस्कान, अपनी खुशियाँ, अपनी ज़िन्दगी खुद के लिए जीने का। "दिल में तूफ़ान हो गया बरपा , तुमने जो मुस्कुरा के देख लिया"  (ek mirror look ) एक मुस्कान खुद के लिए… यह सरल नहीं है। यह selfish नहीं है। यह हमारी ज़रूरत है। जब हम दूसरों की उम्मीदों और मांगों के बोझ तले दबे रहते हैं, तो हम केवल ज़िंदा होते हैं, लेकिन जीते नहीं। और जीना—सच में जीना—शुरू होता है तब जब हम खुद की खुशी को मान्यता देते हैं। हमने बहुत कुछ सहा है। बहुत दर्द, बहुत निराशा, बहुत अधूरी उम्मीदें। । हमने अपने आप को छोटा किया, अपने स...