"रक्षाबंधन:-एक ऐसा एहसास जो शब्दों में बंधता नहीं- -भाई-बहन का रिश्ता"
रक्षाबंधन: वो धागा जो खून के रिश्ते से भी गहरा है राखी सिर्फ रेशम का एक धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच जनम-जनम के अटूट विश्वास और निस्वार्थ प्रेम का सबसे पावन प्रतीक है जब कलाई पर राखी सजती है, तो बचपन की वो खट्टी-मीठी नोकझोंक, तकियों की लड़ाई और एक-दूसरे के सीक्रेट्स छुपाने वाली खूबसूरत यादें फिर से ताज़ा हो जाती हैं राखी पर विशेष लेख ज़रूर पढ़े रक्षाबंधन सिर्फ एक त्यौहार नहीं, यह ए क एहसास है। एक ऐसा एहसास जो शब्दों में बंधता नहीं, पर एक पतले से धागे में समा जाता है। जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो वह सिर्फ रेशम का धागा नहीं बांधती — वह बरसों के झगड़े, प्यार, शिकायतें और वो अनकहा भरोसा बांधती है जो सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते में ही मिलता है। रक्षाबंधन सिर्फ एक त्यौहार नहीं, यह एक एहसास है। एक ऐसा एहसास जो शब्दों में बंधता नहीं, पर एक पतले से धागे में समा जाता है। जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो वह सिर्फ रेशम का धागा नहीं बांध...