"होली पर विशेष : होली के रंग,सम्मान के संग "
होली पर विशेष: होली के रंग, होली … रंगों का त्यौहार… मिलन का बहाना… खुशियों की पहचान… लेकिन क्या… हर किसी के लिए होली के रंग एक जैसे होते हैं…? आओ बात करें… उन रंगों की… जो दिखते नहीं… पर हर साल… कई दिलों पर गहरे छप जाते हैं… होली के रंग: खुशी या इम्तेहान? कहने को होली… बराबरी का त्यौहार है… इस दिन… अमीर-गरीब… ऊँच-नीच… सब एक ही रंग में रंग जाते हैं… पर सच ये भी है … कि हर औरत… हर बच्चा… हर कमज़ोर इंसान… इस दिन… खुद को पहले समझाता है— “थोड़ा सह लो… होली है…” क्या सच में… त्यौहार का मतलब यही है…? कि किसी की असहजता को हम मज़ाक में बदल दें…? औरत और होली: हर बार समझौता क्यों? होली के दिन… रंग सिर्फ चेहरे पर नहीं लगते… कई बार… हदों को भी पार कर जाते हैं… कभी “मस्ती” के नाम पर… किसी की मर्यादा छू ली जाती है… कभी “मज़ाक” के नाम पर… किसी की चुप्पी खरीद ली जाती है… और हर बार… उसे यही कहा जाता है— “अरे… होली है!” पर क्या… “होली है” कहना… किसी की असहमति को नज़रअंदाज़ करने का लाइसेंस बन गया है…? वो हँस देती है… क्योंकि माहौल खराब नहीं करना चाहती… वो चुप रह जाती है… क्योंकि कोई उसे “OVER ...