“मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।”:--- मन की स्थिति
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत परमात्मा को पाइए मन ही के प्रतीत" मन के हारे हार है, मन के जीते जीत" संत कबीरदास जी का एक प्रसिद्ध दोहा है, जिसका अर्थ है कि जीत और हार हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है । यदि आप मन में हार स्वीकार कर लेते हैं, तो आप हार जाते हैं, और यदि मन में जीत का निश्चय कर लेते हैं, तो सफल होते हैं। यह कहावत आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को सबसे महत्वपूर्ण मानती है मन… एक ऐसा शब्द, जो छोटा है, लेकिन इसकी गहराई पूरी जिंदगी को दिशा दे देती है। इंसान बाहर से जितना भी मजबूत क्यों न दिखे, उसकी असली ताकत उसके मन की स्थिति पर निर्भर करती है। यही वजह है कि कहा गया है— “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।” लेकिन सवाल ये है कि जब मन ही चंचल हो, डगमगाता रहे, कभी इधर तो कभी उधर भागता रहे… तब जीत कैसे मिले? 🧠 मन की चंचलता — असली युद्ध भीतर है मन का स्वभाव ही चंचल है। वो कभी अतीत में जाता है, कभी भविष्य की चिंता में उलझ जाता है। कभी कहता है: “तुम नहीं कर पाओगे” कभी कहता है: “कल से शुरू करेंगे” कभी डराता है: “अगर असफल हो गए तो?” यही च...