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ख़ामोशी के दर्द----कुछ अपने, कुछ अपनों के ... दिल को छू लेने वाली सच्चाई

CHAPTER-4   और वो चली गयी... ... वो ज्यादा बोलती नहीं थी  बस सब सुन लेती थी  घर के शोर में उसकी आवाज़ कभी ऊपर नहीं आयी  बच्चों की पढ़ाई  घर की जिम्मेदारियां  और रिश्तों के बीच वो खुद को कही रख ही नहीं पाई .... लोग कहते थे वो strong    पर STRONG का मतलब ये नहीं होता   कि दर्द महसूस ही न हो......  वो रोज़ थक कर भी मुस्कुरातीं रही  अपनी परेशानियों को बाद में  देख लेंगे कह कर टालती रही  किसी ने नहीं पूछा...... उसका दिन केसा गया......  किसी ने नहीं देखा   कब उसकी आँखों की चमक धीरे धीरे बुझने लगी  और फिर एक दिन --- सब कुछ नार्मल। .. सुबह भी हुई...  शाम भी आयी  लेकिन बस एक चीज़ बदल गयी  वो फिर किसी को नज़र नहीं आयी.... वो चली गयी..( दुनिया से )  लोग हैरान थे  उसने कुछ कहा "क्यों नहीं ?" किसी को बताया क्यों नहीं  लेकिन वो बताती किसे । .....सब तो  अपने थे, वो अपने "क्या सुनते  भी है"?.. .ये तो उसे पता ही नहीं था  ये वो अपने थे.....  जो कुछ बोलने ...