इस होली रंग बदले: गुलाल के साथ , रिश्तों में सम्मान और प्यार के रंग
इस होली रंग बदले: गुलाल के साथ , रिश्तों में सम्मान और प्यार के रंग होली है .... तो रंग तो होना ही चाहिए। पर दोस्तों, इस बार रंगों को थोड़ा सा बदल कर देखें। हरा ,नारंगी, लाल, गुलाल के साथ क्यों न कुछ प्यार भरे शब्दों की होली खेली जाये। क्योकि चेहरों को सुर्ख लाल करना, सिर्फ रंगों से ज़रूरी नहीं , कभी कभी दो मीठे शब्द भी वो रंग चढ़ा जाते है. जो दिनों तक नहीं उतरता। इस होली माता पिता के दुलार के रंग हों, भाई बेहन के विश्वास के रंग हो, पति-पत्नी के प्यार और सम्मान के रंग हो, और हर रिश्ते में व्यवहार के रंग भर दिए जाये क्योंकि रंग अगर रिश्तों में उतर जाएँ तो ज़िंदगी खुद त्यौहार बन जाती है। "होली के रंग, अपनों के संग" का भाव ही कुछ निराला है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और अपनों के साथ पुराने गिले-शिकवे भुलाकर नए रिश्ते जोड़ने का पर्व , सभी को गले लगाकर, प्रेम और भाईचारे का रंग फैलाएं। मिलजुल कर होली मनाएं, स्वादिष्ट गुजिया औ...