"राखी: भाई-बहन के प्यारे त्योहार का महत्व, इतिहास और भावनाएँ" -भाग-2
अब चलते हैं भाग-2 की ओर... भाग-1 तो आपने पढ़ ही लिया है रक्षाबंधन का इतिहास... लेकिन केवल इतिहास नहीं, एक एहसास हमने बचपन से कई कथाएँ सुनी हैं... कभी श्रीकृष्ण और द्रौपदी की... तो कभी रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ की। इन कथाओं में इतिहास कितना है और परंपरा कितनी—इस पर विद्वानों की अलग-अलग राय हो सकती है। लेकिन इन सबके पीछे छिपा संदेश एक ही है... जब विश्वास का धागा बँधता है, तब रिश्ते केवल खून से नहीं... दिल से बनते हैं। कहते हैं... जब श्रीकृष्ण की उँगली से रक्त निकला... तो द्रौपदी ने बिना सोचे अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उँगली पर बाँध दिया। वह कपड़े का टुकड़ा छोटा था... लेकिन उसके पीछे छिपा प्रेम... इतना विशाल था कि इतिहास ने उसे अमर कर दिया। शायद इसलिए... राखी की असली कीमत उसके धागे में नहीं... उसे बाँधने वाली भावना में होती है। राखी का सबसे बड़ा उपहार क्या है? क्या महँगी घड़ी? क्या सोने की चेन? क्या नया मोबाइल? शायद... नहीं। ज़रूर पढ़े भाई बहन का प्यार और विश्वास क्योंकि...