" हे कभी सुना ---"ख़ामोशी जब बोलने लगती है "---पहली दस्तक
CHAPTER—2 🍃 आओ बात करें… ख़ामोशी की आवाज़ से इंसान को अजीब ही मिट्टी से गढ़ा है भगवान ने… खासतौर पर एक औरत को। जब वह मुस्कुराती है… तो जैसे पूरी कायनात खूबसूरत हो जाती है, मानो कहीं धीमा-सा संगीत बज रहा हो, और हर तरफ खुशबू-सी फैल जाती हो। लेकिन… क्या कभी आपने सुना है— वो जब ख़ामोश हो जाती है… तो उसकी ख़ामोशी भी बोलने लगती है। आओ बात करें… उन बातों की, जो हर रोज होंठों तक आकर फिर भीतर ही कहीं गिर जाती हैं। क्योंकि हर कोई बोलना चाहता है, पर सुनना… सुनना किसी को नहीं आता। हमने भी कोशिश की थी— समझाने की, जताने की, खुद को सही ठहराने की। पर हर बार… शब्द किसी दीवार से टकराकर लौट आए। तभी हमने चुप रहना सीख लिया। चुप्पी… पहले आसान लगती है। क्योंकि उसमें सवाल नहीं होते, जवाब नहीं देने पड़ते। पर यही चुप्पी… धीरे-धीरे बोझ बन जाती है। और एक दिन… यही ख़ामोशी बोलने लगती है। जब ख़ामोशी अंदर जमा होने लगे… सीने में अजीब-सी घुटन, आँखों में बिना नाम का दर्द, और दिल में बिन बोले शब्दों की भीड़। वो लम्हा… डरावना होता है— जब इंसान खुद से भी बात करना छोड़ दे। सवाल: क्या सच में चुप रहना सही होता है? जवाब: कभी-...