"उम्मीद क्या है? मुश्किल समय में उम्मीद की असली ताक़त "
उम्मीद… एक छोटी सी रोशनी, जो कभी बुझती नहीं… कहते हैं… उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, किसी से भी। पर सच बताऊँ? "होती तो है यार… उम्मीद"। हवा से, खुशियों से, पानी से, अपनों से… और कभी-कभी "उस आसमान से भी जिसे छूना नामुमकिन लगता है। क्यों? होती है ना। ... एक उम्मीद " जब सब टूटने लगता है… जब सब कुछ बिखरता सा महसूस होता है, तब भी… दिल के किसी कोने में एक छोटी सी उम्मीद, चुपचाप बैठी रहती है। और धीरे से कहती है— “रुक मत… अभी सब खत्म नहीं हुआ।” उम्मीद की तस्वीर… आँधी भरी रात में दूर टिमटिमाते तारे जैसी, सूखी धरती पर पहली बारिश की बूंद जैसी… उम्मीद ही तो है— जो थके कदमों को फिर चलना सिखाती है। खाली हाथों में भी कल के सपने सजा देती है। उम्मीद क्यों ज़रूरी है? सच कहूँ… अगर उम्मीद न होती, तो इंसान ज़िंदा तो रहता, पर जी नहीं पाता। इसलिए… उम्मीद से डरना नहीं। क्योंकि ....."कभी-कभी यही एक दीपक होती है जो अंधेरे को धीरे-धीरे हराती है"… और एक दिन सुबह सच में हो जाती है। दिल और उम्मीद… लोग कहते हैं— “कम उम्मीद रखो, दुःख कम होगा।” पर दिल… बड़ा अजीब होता है। यह तर्क नहीं मानता,...