"सावन का महीना :-- झूले की पींगें, घेवर की मिठास.. हरियाली तीज "



 "जब सावन गुनगुनाता है, तब तीज आती है"


झूले की पींगें, घेवर की मिठास, और मेहँदी की खुशबू —

 यही तो है स्त्री का सबसे प्यारा उत्सव

 

 सावन का महीना जब दस्तक देता है, तो हवाओं में एक अलग ही ताज़गी घुल जाती है। आसमान में काले-काले बादल लहराने लगते हैं, धरती सोंधी खुशबू से भर उठती है, और पेड़ों की शाखों पर झूले पड़ जाते हैं। यही वह समय है जब हर औरत के दिल में एक गीत जन्म लेता है — तीज का गीत।

 तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं है। 

तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं है। यह एक अनुभव है, एक भावना है,

 एक परंपरा है जो सदियों से माँ से बेटी तक चली आ रही है।

 यह वह दिन है जब हर स्त्री सजती है, सँवरती है और अपनी माटी, अपनी जड़ों से जुड़ती है।


 🌧️ सावन — वह महीना जो दिल को छू जाता है

 सावन महीने की अपनी ही एक आत्मा होती है। जब पहली बारिश की

 बूँदें जमीन पर गिरती हैं, तो लगता है जैसे ऊपरवाले ने धरती को प्यार से 

नहला दिया हो। हर तरफ हरियाली फैल जाती है, मोर नाचने लगते हैं, 

और कोयल की आवाज़ मन को किसी सुदूर यादों की दुनिया में ले जाती है।

 सावन का यह महीना स्त्रियों के लिए खास इसलिए भी है क्योंकि यह उनकी 

अपनी भावनाओं का मौसम है। प्रेम, विरह, उत्साह, श्रृंगार — सब कुछ इसी महीने में

 एक साथ जीवंत हो उठता है। और इसी के बीच तीज का त्योहार आता है —

 जैसे सावन का सबसे सुंदर फूल।

 

❝ सावन में जो बात है, वह किसी और महीने में कहाँ?

जब बादल घिरते हैं, तो मन भी घिर आता है — पर यह घिराव अच्छा लगता है। ❞

       झूले — बचपन की उड़ान, बड़े होने का एहसास

 तीज और झूले — इन दोनों का रिश्ता उतना ही पुराना है जितना सावन और बारिश का। 

पेड़ की मज़बूत शाखों पर पड़े रंगीन झूले जब हवा में पींगें भरते हैं, तो मन बरसों पीछे चला जाता है। वह आँगन, वह नीम का पेड़, वह माँ की पुकार — सब कुछ आँखों के सामने आ जाता है।

 

झूले पर बैठकर झूले की पींगें सिर्फ एक खेल नहीं है। यह उस स्वतंत्रता का प्रतीक है

 जो हर औरत अपने भीतर महसूस करती है — बंधनों से परे, जिम्मेदारियों से ऊपर, 

बस खुद के लिए कुछ पल। तीज के झूले उस उड़ान का नाम हैं जो ज़मीन पर रहकर भी आसमान छू लेती है।

 

पुराने ज़माने में सहेलियाँ मिलकर लोकगीत गाती थीं, और झूला झूलती थीं। 

आज भले ही ज़माना बदल गया हो, पर तीज के झूले का जादू आज भी वैसा ही है —

 बस एक बार झूल जाओ, और सारी थकान उड़ जाती है।


 🍯 घेवर — सावन की मिठास का दूसरा नाम

 तीज का ज़िक्र हो और घेवर न आए — यह कैसे मुमकिन है? 

सावन में घेवर वैसा ही ज़रूरी है जैसे होली में गुझिया और दीवाली में लड्डू।

 लेकिन घेवर सिर्फ एक मिठाई नहीं है — यह एक अनुभव है।

 उस करारे, जालीदार, केसर-रबड़ी से सजे घेवर की पहली बाइट जब मुँह में जाती है, 

तो लगता है सावन की सारी मिठास एक पल में समा गई। 

घेवर राजस्थान की पहचान है, पर आज यह पूरे उत्तर भारत के घरों में तीज के मौसम में राज करता है।

 

🍯 घेवर की परंपरा —

घेवर सावन महीने में विशेष रूप से बनाया जाता है। 

मैदा, घी और दूध से तैयार यह मिठाई जब शक्कर की चाशनी में डूबती है

 और ऊपर से केसरी रबड़ी की परत चढ़ती है, उस पर लगी मावा की layer बहुत स्वादिष्ट लगती है  

 तब यह सिर्फ मिठाई नहीं रहती —  यह स्नेह का प्रतीक बन जाती है।

  ससुराल से मायके भेजा जाने वाला सिंधारा इसी मिठास से शुरू होता ह

 

🎁 सिंधारा — प्रेम का वह PACKAGE जो दिल तक पहुँचता है

 ──              तीज का सबसे भावुक पल होता है —सिंधारा' शब्द संस्कृत के 'श्रृंगार' से आया है。

 यह त्योहार मुख्य रूप से विवाहित और नवविवाहित महिलाओं के लिए मायके से मिलने वाला 

एक विशेष सम्मान और प्रेम का प्रतीक है, तो उस थाल में 

सिर्फ कपड़े, गहने और मिठाइयाँ नहीं होतीं — उसमें होता है

:-- ढेर सारा प्यार, ढेर सारी दुआएँ।

 उस थाल को देखते ही जो मुस्कान आती है, वह शब्दों में बयान नहीं होती।

  लहरिया की साड़ी, चूड़ियाँ, बिंदी, मेहँदी, और ऊपर से 

घेवर की डिब्बी — यह सब मिलकर एक ऐसा संदेश देते हैं जो बिना बोले बहुत कुछ कह जाता है।

                      (तीज पर एक और खूबसूरत अनुभव ज़रूर पढ़े )

सिंधारे की परंपरा बताती है कि हमारी संस्कृति में स्त्री का सम्मान हमेशा से रहा है। 

वह घर की बेटी है, बहू है, माँ है — और तीज पर सिंधारा उसे याद दिलाता है

 कि वह अकेली नहीं है, उसका पूरा परिवार उसके साथ है।

 ❝ सिंधारे की थाल में जब हाथ पड़ता है,

तो दिल भर आता है —

यह प्यार की भाषा है, जिसे शब्दों की ज़रूरत नहीं। ❞

 

 🌺 मेहँदी और श्रृंगार — जब स्त्री खुद के लिए सजती है

 तीज का श्रृंगार किसी और त्योहार से अलग होता है। यहाँ औरत सिर्फ दिखने के लिए नहीं सजती —

 वह महसूस करने के लिए सजती है। हाथों पर मेहँदी रचाना, लहरिया ओढ़ना, पैरों में पायल पहनना

 यह सब एक आंतरिक उत्सव है।

 मेहँदी की खुशबू जब हवा में घुलती है, तो लगता है सावन और भी गहरा हो गया।

 हथेलियों पर बनी बेलें और फूल जैसे कह रहे हों — "तू सुंदर है, तू खास है, यह दिन तेरा है।"

 

तीज के दिन औरतें व्रत रखती हैं, पूजा करती हैं, और भगवान शिव-पार्वती से सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। लेकिन इस सबके बीच जो सबसे ज़रूरी बात है — वह यह कि इस दिन हर स्त्री को अपने आप पर गर्व महसूस करना चाहिए। वह जो है, जैसी है — सुंदर है, संपूर्ण है।

 

🌸KHAMOSH KALAM से — दिल की बातें 🌸

ज़माने कितने बदल जाये लेकिन गली मोहल्ले की औरतें जब पींग लेते है, 

मेहँदी की सुगंध चारो और सावन के मौसम को और भी सुहाना कर देती है। ।

 

हर सिंधारे की थाल में प्यार भरा मिले,

हर मेहँदी की रंगत गहरी हो जैसे दिल का रिश्ता,

और इस बरस की तीज आपके जीवन में

एक नई शुरुआत लेकर आए।

  

जो सपने आपने देखे हैं, वे पूरे हों,

जो दुआएँ माँगी हैं, वे कबूल हों,

सावन की यह तीज आपके हर दुख को

बारिश की तरह बहा ले जाए।

 

आप सजी रहें, मुस्कुराती रहें,

जीवन के हर मोड़ पर झूला झूलती रहें —

क्योंकि आप वह शक्ति हैं जिससे

यह त्योहार जीवित है, यह परंपरा ज़िंदा है।

 — यह त्योहार आपका है

 तीज छोटा त्योहार ज़रूर है, लेकिन इसकी गूँज बहुत गहरी है।

 यह त्योहार बताता है कि स्त्री की भावनाओं का, उसके प्रेम का, 

उसके सौंदर्य का उत्सव मनाया जाना चाहिए — और मनाया जाता है।

 झूले से लेकर सिंधारे तक, मेहँदी से लेकर घेवर तक — 

सब कुछ उसी एक स्त्री के लिए है जो पूरे साल घर, परिवार और दुनिया को संभालती है।

 

इस तीज पर — खुद के लिए जिएँ। झूला झूलें, गाना गाएँ, मेहँदी लगाएँ, घेवर खाएँ।

 क्योंकि आप इसकी हकदार हैं — हर पल, हर साल।

                      तो आपको कैसा लगता है तीज :-

🌸 हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌸 PLEASE SHARE

"BUM BUM BHOLE....BUM BUM BHOLE..... TEEJ KE JHULE"

 


 

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