"इत्र की खुशबू... जो यादों को महकाए"---खूबसूरत सफर
इत्र की खुशबू... जो यादों को महकाए
कुछ खुशबुएँ शरीर पर नहीं, रूह पर लगती हैं...
— खामोश कलम
कभी-कभी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सफर किसी सड़क, किसी स्टेशन या किसी मंज़िल से नहीं शुरू होता...
वह शुरू होता है एक खुशबू से।
वो इत्र की खुश्बू , जो बाहर से नहीं। ....
अंदर से भी महकती है।
यादें बहुत खूबसूरत होती है
जो खुश्बू बन कर आती है ,
और दिल के हर कोने में बस जाती है।
एक ऐसी खुशबू, जो अचानक किसी गुजरते हुए पल में हवा के साथ आकर आपकी सांसों को छू लेती है और फिर आपको वर्षों पीछे ले जाती है...
उस आंगन में...
जहाँ दादी शाम को तुलसी के पास दिया जलाती थीं।
उस गली में...
जहाँ बारिश के बाद मिट्टी महकती थी।
उस कमरे में...
जहाँ माँ की अलमारी में रखा इत्र पूरे घर को अपने होने का एहसास करवाता था।
और तब समझ आता है कि...
यादों का भी अपना एक इत्र होता है।
जिसे वक्त कभी पुराना नहीं कर पाता।
खुशबुएँ कभी बूढ़ी नहीं होतीं
इंसान बूढ़ा हो जाता है।
तस्वीरें पीली पड़ जाती हैं।
दीवारों का रंग उतर जाता है।
लेकिन कुछ खुशबुएँ...
वर्षों बाद भी उतनी ही ताज़ा रहती हैं।
क्योंकि उनका रिश्ता हमारी नाक से नहीं...
हमारे दिल से होता है।
आपने भी महसूस किया होगा...
किसी दुकान से गुजरते हुए अचानक कोई जानी-पहचानी खुशबू आती है और एक पल में आपको किसी खास इंसान की याद आ जाती है।
वह इंसान शायद आज आपके साथ न हो...
लेकिन उसकी मौजूदगी उस खुशबू में अब भी जिंदा होती है।
हर इत्र के पीछे एक कहानी होती है
बाजार में बिकने वाली छोटी-सी शीशी सिर्फ खुशबू नहीं बेचती।
वह बेचती है...
यादें।
भावनाएँ।
किस्से।
अधूरे खत।
और कभी-कभी किसी का इंतज़ार भी।
किसी के लिए गुलाब का इत्र सिर्फ एक सुगंध होगा।
लेकिन किसी और के लिए...
वह उसकी पहली मुलाकात का एहसास हो सकता है।
किसी के लिए ऊद (Oud-agarwood) की खुशबू शाही अंदाज होगी।
तो किसी के लिए वह ईद की सुबह होगी...
जब पूरा घर नई खुशबुओं से भर जाता था।
कुछ लोग चले जाते हैं...
लेकिन उनकी खुशबू रह जाती है
ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच यही है।
लोग हमेशा साथ नहीं रहते।
लेकिन उनकी यादें रहती हैं।
और उन यादों का सबसे मजबूत पुल होती है...
खुशबू।
दादी की चादर।
पिता की शर्ट।
माँ का दुपट्टा।
या किसी अपने की पुरानी डायरी...
इन सबमें समय के साथ एक ऐसी महक बस जाती है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
शायद इसी वजह से लोग पुरानी चीज़ें संभालकर रखते हैं।
उन्हें चीज़ों से मोह नहीं होता।
उन्हें उन खुशबुओं से प्यार होता है...
जो उनमें कैद होती हैं।
इत्र सिर्फ शरीर को नहीं...
आत्मा को भी सजाता है
आज की दुनिया में लोग ब्रांड देखते हैं।
कीमत देखते हैं।
पैकेजिंग देखते हैं।
लेकिन पुराने समय में लोग खुशबू का मतलब समझते थे।
इत्र लगाना केवल फैशन नहीं था।
यह एक एहसास था।
एक तहज़ीब थी।
एक पहचान थी।
कोई गुलाब पसंद करता था।
कोई चमेली।
कोई खस।
और कोई मिट्टी की खुशबू।
हर खुशबू इंसान के व्यक्तित्व की तरह अलग होती थी।
जैसे हर दिल की अपनी कहानी होती है।
सबसे खूबसूरत खुशबू कौन-सी है?
अगर यह सवाल किसी इत्र बेचने वाले से पूछो तो वह शायद किसी महंगे इत्र का नाम बताए।
लेकिन अगर यह सवाल किसी बूढ़ी माँ से पूछो...
तो वह कहेगी—
"मेरे बच्चों के बचपन की खुशबू।"
अगर किसी प्रेमी से पूछो...
तो वह कहेगा—
"उसके दुपट्टे की खुशबू।"
अगर किसी प्रवासी से पूछो...
तो वह कहेगा—
"अपने गांव की मिट्टी की खुशबू।"
क्योंकि असली खुशबू बोतलों में नहीं मिलती।
वह दिलों में रहती है।
यादों का इत्र कभी खत्म नहीं होता
दुनिया का हर इत्र एक दिन खत्म हो जाता है।
शीशी खाली हो जाती है।
खुशबू उड़ जाती है।
लेकिन यादों का इत्र...
कभी खत्म नहीं होता।
जितना पुराना होता जाता है...
उतना ही कीमती हो जाता है।
कभी किसी पुराने गीत में।
कभी किसी तस्वीर में।
कभी किसी बरसाती शाम में।
और कभी किसी अनजान राहगीर की खुशबू में...
वह फिर से लौट आता है।
शायद इसी लिए...
हम सब अपनी जिंदगी में खुशबुएँ जमा करते रहते हैं।
कभी रिश्तों के रूप में।
कभी यादों के रूप में।
कभी मुस्कानों के रूप में।
और कभी उन लोगों के रूप में...
जो हमारी जिंदगी को महका कर चले जाते हैं।
कुछ लोग फूलों जैसे होते हैं।
उनके जाने के बाद भी उनकी खुशबू लंबे समय तक हमारे आसपास रहती है।
और कुछ लोग इत्र जैसे...
जो दिखाई नहीं देते,
लेकिन उनकी मौजूदगी हर पल महसूस होती है।
खामोश कलम की बात
अगर जिंदगी को एक इत्र की शीशी मान लिया जाए...
तो उसमें सबसे जरूरी चीज़ खुशबू नहीं,
यादें होंगी।
क्योंकि खुशबू समय के साथ उड़ जाती है।
लेकिन यादें...
रूह की तहों में उतर जाती हैं।
वर्षों बाद भी जब कोई हवा का झोंका उन्हें छूता है...
तो पूरा अतीत फिर से महक उठता है।
इसलिए जब भी किसी अपने से मिलो...
ऐसी याद छोड़कर जाना कि तुम्हारे जाने के बाद भी उसकी जिंदगी में तुम्हारी खुशबू बनी रहे।
क्योंकि दुनिया में सबसे अमीर इंसान वह नहीं...
जिसके पास सबसे महंगा इत्र हो।
बल्कि वह है...
जिसकी यादें लोगों के दिलों में खुशबू बनकर बस जाएँ।
और शायद...
यही जिंदगी का सबसे खूबसूरत इत्र है।
वह इत्र... जो यादों को महकाए।
वो कोई महंगा विदेशी इत्र नहीं, शायद कन्नौज का गुलाब या खस का इत्र था,
जो आज भी यादों की अलमारी खोल देता है।
रूह तक उतर जाए जो, उस इंतज़ार का इत्र।"
— खामोश कलम 🌹✨
.png)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें