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आओ बात करे :शिवरात्रि और मन के अँधेरे की

 शिवरात्रि पर स्पेशल:-- "हे भोले बाबा, मेरे भोले नाथ ,  तीनो लोक में  तू ही तू."..  जब दुनिया के शोर में मन अपनी आवाज़ खो देता है, तब शिव का नाम ही है जो हमे वापस खुद से मिलता है।  शिवरात्रि सिर्फ एक त्यहार नहीं, ये एक अंतर-यात्रा है--- जहा हम अपनी कमज़ोरी, अपना दर्द, अपनी थकान  भोले नाथ के चरणों में अर्पण कर  देते है। जब शिव के साथ माँ पार्वती  होती है तो  भक्ति में शक्ति और शक्ति में  करुणा जुड़ जाती है  शिव का अर्थ: विनाश नहीं निर्माण है   अक्सर लोग शिव को विनाश का देवता  कहते हैं,पर सच ये है,   शिव विनाश नहीं परिवर्तन  है।  जो गलत है उसे तोडना ,जो सच है उसे बचाना,  ये शिव का स्वरुप है :- शिव:"  वो शून्य है जहाँ से सब शुरू होता है. और वो स्थिरता है जहा सब ठहर जाता है," जब जीवन में सब कुछ उलझा हुआ लगता है  तब शिव हमे सिखाते है - सब कुछ पकड़ने से नहीं , बल्कि छोड़ने से मिलता है।  माँ  पार्वती  : शक्ति जो संभाल लेती है  अगर शिव तपस्या है  तो पार्वती   समर...