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"माँ चंद्रघंटा : जब भय मिटता है और साहस जन्म लेता है"..

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✨ तीसरा नवरात्र: माँ चंद्रघंटा का आशीर्वाद   जब भय मिटता है… और साहस जन्म लेता है… आओ… बात करें… माँ चंद्रघंटा के आशीर्वाद की… अपने डर से… अपने साहस तक की यात्रा की… 🌙 नवरात्रि का तीसरा दिन… शक्ति सिर्फ मंदिरों में जलते दीयों में नहीं होती… शक्ति छुपी होती है— उस पल में… जब आप अपने सबसे बड़े डर के सामने खड़े होते हो…   मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप :-- मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।  पौराणिक कथा के अनुसार, जब महिषासुर का आतंक बढ़ा, तो माता ने घंटे के आकार के  अर्धचंद्र मस्तक पर धारण कर देवताओं की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर महिषासुर  का वध किया था। इस कथा का वाचन शक्ति, साहस और नकारात्मकता के नाश के लिए किया जाता है।  मां चंद्रघंटा की पौराणिक कथा :-- महिषासुर का आतंक: पौराणिक कथाओं के अनुसार, दैत्यराज महिषासुर ने स्वर्ग लोक  पर अधिकार करने के लिए देवताओं से भयंकर युद्ध किया। महिषासुर का उद्देश्य  इंद्र का सिंहासन छीनकर तीनों लोकों पर राज करना था। देवताओं की प्रार्थना: महिषासुर के अत्याचार से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान विष्णु, ब्रह्मा  और...