"सावन का महीना :-- झूले की पींगें, घेवर की मिठास.. हरियाली तीज "
" जब सावन गुनगुनाता है, तब तीज आती है" झूले की पींगें, घेवर की मिठास, और मेहँदी की खुशबू — यही तो है स्त्री का सबसे प्यारा उत्सव सावन का महीना जब दस्तक देता है, तो हवाओं में एक अलग ही ताज़गी घुल जाती है। आसमान में काले-काले बादल लहराने लगते हैं, धरती सोंधी खुशबू से भर उठती है, और पेड़ों की शाखों पर झूले पड़ जाते हैं। यही वह समय है जब हर औरत के दिल में एक गीत जन्म लेता है — तीज का गीत। तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं है। तीज सिर्फ एक त्योहार नहीं है। यह एक अनुभव है, एक भावना है, एक परंपरा है जो सदियों से माँ से बेटी तक चली आ रही है। यह वह दिन है जब हर स्त्री सजती है, सँवरती है और अपनी माटी, अपनी जड़ों से जुड़ती है। 🌧️ सावन — वह महीना जो दिल को छू जाता है सावन महीने की अपनी ही एक आत्मा होती है। जब पहली बारिश की बूँदें जमीन पर गिरती हैं, तो लगता है जैसे ऊपरवाले ने धरती को प्यार से नहला दिया हो। हर तरफ हरियाली फैल जाती है, मोर नाचने लगते हैं, और कोयल की आवाज़ मन को किसी सुदूर यादों की दुनिया में ले जाती है। ...