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“आप जो सोचते हो, वही बनते हो”---क्या सिर्फ सोच लेने से सचिन तेंदुलकर बना जा सकता है?

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  “आप जो सोचते हो, वही बनते हो” — क्या सिर्फ  सोच लेने से सचिन तेंदुलकर बना जा सकता है? “माँ, अब आप ज़्यादा टेंशन मत लिया करो... मैं तो सचिन तेंदुलकर बनूँगा।” माँ ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा! वो कैसे?” बेटा बड़े आत्मविश्वास से बोला, “सब कहते हैं ना कि इंसान वही बनता है जो सोचता है।  मैं दिन-रात क्रिकेट के बारे में सोचता हूँ, सचिन के वीडियो देखता हूँ , गेम खेलता हूँ, तो आखिर में सचिन ही बनूँगा। और फिर सचिन करोड़पति है... उससे ज़्यादा क्या चाहिए?” बेटे की बात सुनकर माँ चुप हो गई। क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा सचिन के बारे में तो बहुत सोचता है, लेकिन सुबह समय पर उठना नहीं चाहता। मैदान में पसीना बहाने की जगह मोबाइल पर क्रिकेट गेम खेलता है। अभ्यास की जगह HIGHLIGHTS देखता है। और जिम्मेदारियों की बात आते ही विषय बदल देता है। यहीं से एक बहुत बड़ा सवाल जन्म लेता है। आज के बच्चे समझदार बहुत है.. लेकिन सिर्फ बातों को MANUPULATE  करने से करियर नह बनते। अभी ये भी युवा पीढ़ी को समझना पड़ेगा।  AI GENERATION उफ़्फ़ -----माँ आपको क्या पता में कितना FAST हूँ?  क्या सिर्फ स...