बुनियाद — हमारी पहचान की असली नींव — (एक आईना समाज के नाम)
बुनियाद — हमारी पहचान की असली नींव “मजबूत इमारतें ऊँचाई से नहीं, मजबूत बुनियाद से पहचानी जाती हैं।” बुनियाद घर की हो तो ईंटो की नींव मजबूत होनी चाहिए। ताकि मकान सालो साल मजबूत रहे.. लेकिन परिवार की बुनियाद घर में रहने वाले लोगो के संस्कारों से मजबूत बनती है...हमारे अच्छे विचार से , अच्छा परिवार बनता है. अच्छा परिवार तो अच्छे समाज की बुनियाद होती है। हम अक्सर कहते हैं — आजकल के बच्चे बड़ों का सम्मान नहीं करते… बच्चे बुजुर्गों के पास बैठना पसंद नहीं करते… बच्चे हमारी बात नहीं मानते… लेकिन क्या हमने कभी ठहरकर खुद से पूछा है — क्यों… आखिर क्यों? क्या सच में गलती केवल बच्चों की है? या कहीं न कहीं हमारी अपनी बुनियाद कमजोर हो रही है? बच्चों को दोष देना आसान है, खुद को देखना मुश्किल जब बच्चे हमारी बात नहीं मानते, तो हम तुरंत शिकायत करने लगते हैं। हम कहते हैं — “आज की पीढ़ी बदल गई है।” लेकिन सच तो यह है कि हर पीढ़ी उसी मिट्टी से बनती है, जो उसे घर में मिलती है। बच्चे केवल किताबों से नहीं सीखते, वे हमारे व्यवहार से सीखते हैं। अगर...