शुक्रवार, 6 मार्च 2026

महिला दिवस -----नारी जाति का सम्मान करने से बनता है ---उज्जवल समाज

महिला दिवस -----नारी जाति का सम्मान----उज्जवल समाज

संसार में महिला दिवस एक दिन नहीं, 

बल्कि नारी के सम्मान के योगदान को याद करने का अवसर है,

महिलाये परिवार,समाज और देश की शक्ति का  आधार है

सिर्फ सशक्त नहीं........ सम्मानित भी....

"सम्मान " ज़रूरी है। 

सिर्फ शब्दों से नहीं,

 व्यवहार में। 

पिता- माता को ,

भाई- बहन को,-

 पति- पत्नी को

देवर -भाभी को

"सम्मान देंग, तो नींव मजबूत होंगी "

आज का समाज तेज है। 

डिजिटल है।

 दिखावे से भरा हुआ है। 

"SOCIAL MEDIA "ने हमे आवाज़ दी है। 

पर उसी के साथ निर्णय लेने की जल्दी देदी। 

आज एक लड़की  ,उसकी सोच से पहले जज की जाती है। 

उसकी मुस्कान को गलत  समझ लिया जाता है। 

उसकी चुप्पी  को कमजोरी मान लिया जाता है। 

ये सिर्फ महिलाओ की समस्या नहीं है। 

ये सोच की समस्या है।

       कहते है ---"नज़र को बदल लो नज़ारे बदल जायेंगे ,

                         सोच को बदल लो सितारे बदल जायेंगे"  

बचपन बदल गया है। 

बच्चे अब कहानियों से कम स्क्रीन से ज्यादा सीखते है। 

रिश्तों की समझ , रील्स की लम्बाई जितनी छोटी  गयी है। 

और इसलिए सम्मान धीरे धीरे optional होता जा रहा है। 

यही चिंता का विषय है। 

क्योंकि जब समाज की सोच बदलती है। 

तो भविष्य की दिशा भी बदलती है। 


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अगर आज कोई  online content से यह सिख रहा है 

की ताक़त का मतलब दबाब है ,

तो वह रिश्तोंमें संतुलन कैसे समझेगा। 

अगर एक लड़की

 हर वक़्त तुलना और ट्रॉल्लिंग से गुजर रही है,

तो उसका आत्मविश्वास कैसे सुरक्षित रहेगा? 

हम एक ऐसे दौर में है जहा "नारी  सशक्तिकरण" की बाते बहुत है,
 पर सम्मान देने की आदत कम है। 
और बिना सम्मान के कोई भी सशक्तिकरण अधूरा है। 
"
"INTERNATIONAL WOMEN'S DAY" 
सिर्फ महिलाओ को strong कह देने का दिन नहीं है। 
यह दिन है यह सोचने का --
"क्या हम अपने घरो में सम्मान देना सीखा रहे है."?
"क्या हम अपने बेटों को सवेदनशील बनना सीखा रहे है?
क्या हम अपनी बेटियों को डर के नहीं, विश्वास के साथ जीना सीखा रहे है।
 
समाज स्त्री और पुरुष दोनों से बनता है। 
अगर एक असुरक्षित होगा,
 तो दूसरा भी स्थिर नहीं रह पायेगा। 
पुरुष को भी एक तय ढांचे में कैद कर दिया गया है। 
मत रो"
हमेशा "मज़बूत बने रहो"
"कमजोरी मत दिखाओ"

और महिलाओ से कहा गया 
"ज्यादा मत बोलो"   ...."ज्यादा आगे मत बढ़ो "। 
"ज्यादा मत दिखो"

दोनों पर दबाब है। 
दोनों पर अपेक्षाएं है। 
फिर भी हम एक दूसरे को दोष देते रहते है। 
असल में ज़रूरत दोष की नहीं दिशा की है। 

social मीडिया बुरा नहीं है। 
पर बिना समझ के उपयोग खतरनाक है। 
अगर बच्चे ,वायरल को सफलता समझेंगे ,
तो मूल्य पीछे छूट जायेंगें। 

अगर LIKES  से आत्मसमान बढ़ेगा तो रिश्ते कमजोर पड़ेंगे। 
इसलिए आज ज़रूरत है डिजिटल साक्षरता की। 
 डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा ज़रूरी है। .ये हम आने वाले  ब्लॉग में विचार करेंगे .

"आज अपनी जननी को प्रणाम ,और पूरी महिला वर्ग को सम्मान देना ही एक ऊँची सोच को व्यक्त करता हैं 
आओ बात करे..... उस सोच पर  जो "महिलाओं को सम्मान का एहसास सिर्फ शब्दों में नहीं व्यवहार में भी करवाएं ".......

और सिर्फ आज नहीं हर पल ,हर कदम पर.... महिला सशक्त तो  समाज सशक्त 
        " HAPPY INTERNATIONAL WOMEN'S DAY"

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