तप ,त्याग और विश्वास की मूर्ति --माँ ब्रह्मचरणी (दूसरा नवरात्रा )🌺

JAI MAA...JAI JAI MAA...                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    "दूसरा नवरात्रा : माँ ब्रह्मचरणी को प्रणाम "🌺🌿🍁

🌺... माँ के दूसरे नवरात्रे की। ......

एक ऐसा दिन जो हमे सिखाता है कि 

शक्ति सिर्फ शोर से नहीं आती....शक्ति तो उस शांति में होती है...

जो तप से जनम लेती है...

आज हम स्मरण करते है 

माँ ब्रह्मचारिणी का---

वो रूप जो त्याग का प्रतीक है...

जो प्रेम में भी तपस्या ढूंढ लेता है। 

और संघर्ष में भी मुस्कुराना सीखा देता है...

माँ ब्रह्मचारिणीका स्वरूप ;---

माँ के हाथों में "एक तरफ जप माला ,

दूसरी तरफ कमंडल" ,....

न कोई आडम्बर ,

न कोई शृंगार। ...

बस एक सदा रूप। ..

जो हमे बताता है कि  

सच्ची शक्ति बाहरी नहीं ,

अंदर की साधना से आती है।


तप की परिभाषा ---

  कहते  है---" माँ ने भगवान शिव को पाने के लिए  

कठोर तपस्या की."..

वर्षो तक बिना अन्न जल के। ....

सिर्फ विश्वास के सहारे। .

यही हमारे लिए एक संदेश है....

कि  अगर इरादा सच्चा हो...

तो रस्ते खुद बन जाते है। ...


"आज के जीवन में:--- माँ का अर्थ"🌺

आज हम सब अपने अपने संघर्षों में है....

कोई  थका है, कोई जिम्मेदारी से...

कोई खुद से ही लड़ रहा है...

पर माँ ,ब्रह्मचरिणी हमे सिखाती है---

रुकना नहीं।।।टूटना नहीं।।।

बस चलते रहना।।।।


क्यों कि हर कठिन समय 

"एक तप ही तो है."..

जो हमे और मजबूत बना रहा है। 

एक छोटी सी कहानी :---

एक छोटी बच्ची ,जो हर रात माँ से कहती थी,
मम्मी आओ न ...बात करें। ..
"उसे न खिलोने चाहिए थे,
न कोई कहानी,
  बस माँ का साथ"। ...

और आज जब वो बड़ी हो गयी .
तो उसे समझ आया--"-वो पल ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी थे"....


माँ से प्रार्थना। ...हे ब्रह्मचारिणी। .
..
हमे भी वो धैर्य दे दो। 
किहम अपने संघर्षो में टूटे नहीं......हमे वो शक्ति दे दो 
कि हम खुद पर विश्वास करना ना भूले।

और सब से ज़रूरी। ...
हमे अपने लोगो के लिए...
थोड़ा समय निकलना सीखा दो। 

और अंत में। ...

नवरात्रि सिर्फ पूजा नहीं है...
ये खुद से मिलने का समय है....

तो आज 
बस 5 मिनट निकालो।।।।
खुद से बात करो...
अपने दिल की सुनो।।।
और कहो---

"आओ...बात करो..बस बात.."

अगर ये शब्द दिल को छू गए हो....
तो आज किसी अपने को कॉल करो
 और कहो...आओ...बात करे...बस बात..."JAI MAA BRMHCHARINI"

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वो चुप थी...ख़ामोशी में छुपी भावनाओं की कहानी

"आओ बात करें… बस बात: मेरी नन्ही परी से शुरू हुई एक प्यारी सी कहानी "

"माँ चंद्रघंटा : जब भय मिटता है और साहस जन्म लेता है"..