तप ,त्याग और विश्वास की मूर्ति --माँ ब्रह्मचरणी (दूसरा नवरात्रा )🌺
JAI MAA...JAI JAI MAA... "दूसरा नवरात्रा : माँ ब्रह्मचरणी को प्रणाम "🌺🌿🍁
🌺... माँ के दूसरे नवरात्रे की। ......
एक ऐसा दिन जो हमे सिखाता है कि
शक्ति सिर्फ शोर से नहीं आती....शक्ति तो उस शांति में होती है...
जो तप से जनम लेती है...
आज हम स्मरण करते है
माँ ब्रह्मचारिणी का---
वो रूप जो त्याग का प्रतीक है...
जो प्रेम में भी तपस्या ढूंढ लेता है।
और संघर्ष में भी मुस्कुराना सीखा देता है...
माँ ब्रह्मचारिणीका स्वरूप ;---
माँ के हाथों में "एक तरफ जप माला ,
दूसरी तरफ कमंडल" ,....
न कोई आडम्बर ,
न कोई शृंगार। ...
बस एक सदा रूप। ..
जो हमे बताता है कि
सच्ची शक्ति बाहरी नहीं ,
अंदर की साधना से आती है।
माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप 'माँ ब्रह्मचारिणी' :---
जो तप, त्याग, और संयम की प्रतीक हैं। पौराणिक कथा के अनुसार,
पार्वती के रूप में हिमालय के घर जन्मीं माता ने नारदजी की सलाह
पर भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों तक निर्जला
और निराहार घोर तपस्या की थी।
माँ ब्रह्मचारिणी व्रत कथा --:
पूर्वजन्म की कहानी: मां ब्रह्मचारिणी ने पिछले जन्म में राजा हिमालय के घर
पुत्री के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने देवर्षि नारद के उपदेश से भगवान शिव
को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।
कठोर तपस्या: माता ने एक हज़ार वर्षों तक केवल फल-फूल खाकर जीवन व्यतीत किया।
अगले सौ वर्षों तक केवल ज़मीन पर रहकर शाक (सब्ज़ियां) खाकर तपस्या की।
अपर्णा नाम: कई वर्षों तक धूप, वर्षा और खुले आसमान के नीचे रहने के बाद,
उन्होंने हज़ारों वर्षों तक सिर्फ टूटे हुए बिल्व पत्र खाए। अंत में, बिल्व पत्र खाना
भी छोड़ दिया और निराहार रहीं, जिसके कारण उन्हें 'अपर्णा' नाम से जाना गया।
वरदान की प्राप्ति: माता की इस अद्भुत तपस्या से प्रसन्न होकर, अंत में भगवान शिव
ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा का महत्व:
मान्यता है कि माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक के जीवन में संयम,
त्याग, सात्विक भाव, और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है।
स्तुति मन्त्र :--
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
तप की परिभाषा ---
कहते है---" माँ ने भगवान शिव को पाने के लिए
कठोर तपस्या की."..
वर्षो तक बिना अन्न जल के। ....
सिर्फ विश्वास के सहारे। .
यही हमारे लिए एक संदेश है....
कि अगर इरादा सच्चा हो...
तो रस्ते खुद बन जाते है। ...
"आज के जीवन में:--- माँ का अर्थ"🌺
आज हम सब अपने अपने संघर्षों में है....
कोई थका है, कोई जिम्मेदारी से...
कोई खुद से ही लड़ रहा है...
पर माँ ,ब्रह्मचरिणी हमे सिखाती है---
रुकना नहीं।।।टूटना नहीं।।।
क्यों कि हर कठिन समय
"एक तप ही तो है."..
जो हमे और मजबूत बना रहा है।
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