माँ तो बस माँ है...माँ का प्यार: एक एहसास जो शब्दों से परे है
माँ तो बस माँ है… शब्द छोटा, संसार बड़ा " HAPPY MOTHER'S DAY"
एहसास है प्यार का,
प्यार का दुलार का,
दुलार संसार का—
क्योंकि संसार ही माँ है…
CHAPTER – 5 : माँ… एक शब्द नहीं, एक संसार है
माँ सुबह की पहली किरण है,
जो खिड़की में नहीं, दिल में उतरती है।
माँ एक आवाज़ है—
जो नाम लेकर नहीं बुलाती,
फिर भी सबसे गहराई तक पहुँच जाती है।
माँ वह स्पर्श है—
जो माथे पर हाथ रखते ही
हर उलझन सुलझा देता है।
माँ धूप भी है, छाँव भी है,
थकान भी है, आराम भी है।
माँ रसोई की खुशबू में घुली हुई दुआ है,
दरवाज़े पर टिका इंतज़ार का सब्र है।
माँ की आँखों में
नींद कम होती है,
चिंता ज़्यादा।
माँ की थाली में रोटी कम पड़ जाए,
पर हमारे हिस्से की कभी कम नहीं होती।
माँ की हथेलियों की लकीरों में
हमारी किस्मत बसती है,
और उसकी झुर्रियों में
हमारे बड़े होने की कहानी लिखी होती है।
माँ वह ताकत है
जो हमारे हिस्से का दर्द छुपाकर
हमें हिम्मत देती है।
वह दीवार है—
जो खुद दरकती है,
पर घर को टूटने नहीं देती।
वह दीपक है—
जो खुद जलता है,
पर उजाला हमें देता है।
माँ की गोद—दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान।
माँ का आँचल—सबसे सुकून भरी छाँव।
माँ की डाँट, उसकी चुप्पी—
सबसे गहरी सीख होती है।
कभी माँ भगवान का दूसरा रूप लगती है,
कभी धरती का धैर्य।
माँ गिरने नहीं देती,
और अगर गिर जाओ—
तो उठना सिखाती है।
वह सिर्फ जन्म नहीं देती—
जीना सिखाती है,
चलना सिखाती है,
और ज़रूरत पड़े तो
अकेले खड़े होना भी सिखाती है।
माँ की दुनिया
हमसे शुरू होकर
हम पर ही खत्म हो जाती है।
उसकी दुआएँ
हमारे हर रास्ते से पहले पहुँच जाती हैं।
माँ की हँसी में घर बसता है,
और उसकी खामोशी में त्याग छुपा होता है।
माँ का “खाना खा लिया?”
पूरे ब्रह्मांड का प्यार होता है।
माँ का “सावधान रहना”
पूरी उम्र की सुरक्षा।
माँ दूर हो तो भी पास होती है,
चुप हो तो भी साथ होती है।
माँ कभी छुट्टी नहीं लेती
माँ कभी आधी नहीं होती
माँ कभी कम नहीं होती
हर भूमिका में पूरी होती है—
बेटी बनकर, पत्नी बनकर,
और सबसे बढ़कर… माँ बनकर।
हमने माँ की उंगली पकड़कर दुनिया देखी,
और उसका हाथ छोड़कर दुनिया जी।
पर हर जीत के बाद
जिसकी तलाश होती है—
वह माँ ही होती है।
माँ—
वह आशीर्वाद है जो बिना माँगे मिलता है,
वह प्रार्थना है जो बिना बोले सुनी जाती है।
वह प्रेम है—
जो कभी शर्तों में नहीं बंधता।
एक छोटी सी कहानी…
गाँव के एक छोटे से घर में मोहन अपनी माँ के साथ रहता था।
अब वह बड़ा हो चुका था, शहर में नौकरी करता था।
उसे लगता—
"माँ को क्या समझ… दुनिया कितनी बदल गई है।"
माँ हर सुबह टिफ़िन बनाती और कहती—
“बेटा, खाना समय पर खा लेना… अपना ध्यान रखना।”
उसे यह सब ज़रूरत से ज़्यादा लगता।
एक दिन वह बीमार पड़ गया।
तेज़ बुखार, कमजोरी… मुश्किल से घर पहुँचा।
दरवाज़े पर माँ खड़ी थी—
जैसे पहले से सब जानती हो।
पूरी रात माँ उसके सिर पर पट्टियाँ रखती रही।
खुद नहीं सोई, पर बेटे को सोने दिया।
सुबह उसने देखा—
माँ वहीं बैठी थी… थकी हुई,
पर चेहरे पर सुकून था।
उसी पल उसे समझ आया—
दुनिया बदल सकती है,
समय बदल सकता है…
पर माँ का दिल कभी नहीं बदलता।
उसने माँ का हाथ पकड़कर कहा—
“माँ… सच में, माँ तो बस माँ है… उसका कोई मुकाबला नहीं।”
Moral
माँ का प्यार किसी शर्त या समय का मोहताज नहीं होता।
दुनिया में हर रिश्ता बदल सकता है,
लेकिन माँ का स्नेह हमेशा सच्चा और स्थायी रहता है।
Khamosh Kalam Whispers…
फूल, उपहार, शब्द—सब छोटे पड़ जाते हैं,
क्योंकि माँ का ऋण चुकाया नहीं जा सकता।
माँ को सिर्फ महसूस किया जा सकता है,
सम्मान दिया जा सकता है।
माँ…
तू घर की धड़कन है,
जीवन की जड़ है,
हर रिश्ते का आधार है।
तू है तो सब है…
तुझे शब्दों में बाँधना संभव नहीं,
फिर भी हर शब्द तुझसे ही शुरू होता है।
आओ बात करें… माँ की।
"जो शब्द नहीं… पर जिसके बिना कोई शब्द नहीं।"
🙏 माँ तुझे कोटि-कोटि वंदन 🙏 PLEASE SHARE
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