गुरुवार, 12 मार्च 2026

माँ तो बस माँ है..... शब्द छोटा ,संसार बड़ा---- एहसास ,प्यार, विश्वास का

माँ तो बस माँ है..... शब्द छोटा ,संसार बड़ा

एक एहसास ,

एहसास है प्यार का,

प्यार का दुलार का ,

दुलार संसार का,

संसार तो  माँ  है.......


CHAPTER- -5

माँ ...एक शब्द नहीं ,

एक संसार है.

माँ सुबह की पहली किरण  है। 

जो खिड़की में नहीं, दिल में उतरती है। 

माँ एक आवाज़ है,

जो नाम ले कर  नहीं बुलाती ,फिर भी सब से गहरी उतरती है,

माँ, वह स्पर्श है,

जो माथे पर हाथ रखते ही सारी उलझने सुलझा देता है। 

माँ....

धुप भी है , छाँव भी है। 

थकन भी है आराम भी है। 

माँ रसोई की खुबू में खुली हुई दुआ है। 

माँ  दरवाजे पर टीके इंतज़ार का सब्र है। 

माँ की आँखों में,

 नींद कम होती है,

चिंता ज्यादा। 

माँ की थाली में ,रोटी कम पड़  जाती है। 

पर हमारे  हिस्से की, कभी कम होती। 

माँ की हथेलियों की लकीरों में, हमरी किस्मत बस्ती है। 

माँ की झुर्रियों में हमारे  बड़े होने की कहानी लिखी होती है। 


माँ वह ताकत है जो हमारे  हिस्से का दर्द छुपा कर 

हमे हिम्मत देती है। 


वह दिवार है जो खुद दरकती है। 

पर घर को टूटने नहीं देती। 

वह दीपक है जो खुद जलता है पर उजाला हमे देता है। 

 माँ की गोद दुनिया का सब से सुरक्षित स्थान है। 

माँ का आंचल सब से अछि छाँव है। 

माँ की  सब से अच्छी सिख है। 

माँ की डांट चुप्पी सब से गहरी समझ है। 

माँ कभी भगवान का दूसरा नाम लगती है.

कभी धरती का धैर्य। 

वह गिरने नहीं देती। 

और अगर गिर जाये तो उठना सिखाती है। 

माँ--- केवल जनम नहीं देती जीना सिखाती है.

चलना सिखाती है । 


और ज़रूरत पड़े तो खड़े होना भी सिखाती है। 


माँ की दुनिया,-----

हम से शुरू हो कर  हम ही  पर खतम होजाती है। 

उसकी दुआएँ हमारे हर रस्ते से पहले पहुंच जाती है। 

माँ की हंसी में घर बसता है। 

माँ की ख़ामोशी में त्याग छिपा होता है। 

माँ के "खाना खा लिया " में पूरा ब्रह्माण्ड छिपा होता है। 

माँ की "सावधान रहना"में 

पूरी उम्र की सुरक्षा छुपी होती है। 


माँ जब दूर होती है तो भी पास होती है। 

जब चुप होती है तो भी साथ होतीहै। 

  •   माँ--- कभी छुट्टी नहीं लेती। 
  •   माँ---  कभी आधी नहीं होती। 
  •   माँ ----कभी कम नहीं होती। 

वह हर भूमिका में पूरी होती है। 
बेटी होकर भी,
पत्नी हो कर  भी ,

और सब से बढ़ कर माँ हो कर,

माँ की ऊगली पकड़ कर हम ने दुनिया देखि 

माँ का हाथ छोड़ कर हम ने दुनिया जी। 

पर हर जीत के बाद जिस की तलाश होती है...वो माँ होती है- 

 माँ --वह आशीर्वाद है जो बिना मांगे मिलता है। 

 माँ--वह प्रार्थना है जो बिना बोले सुनी जाती है। 

वह प्रेम है जो शर्तो से नहीं बांधता। 

 
फूल ,उपहार ,शब्द सब छोटे पड़ जाते है.
क्यों कि माँ का ऋण चुकाया नहीं जा सकता। 
माँ को बस महसूस किया जा सकता है। 
सम्मान दिया जा सकता है। 
 
माँ तू घर की धड़कन है। 
तू जीवन की जड़ है तू हर रिश्ते का आधार है। 
तू है तो सब है 
..
माँ तुझे शब्दों  में बांधना संभव नहीं। ...
फिर भी हर शब्द तुझ से ही शुरू होता है। 

आओ बात करे .....माँ की ....."जो शब्द नहीं तो उसके बिना  शब्द ही नहीं है "
माँ तुझे कोटि कोटि वंदन। .....





 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें