बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

माँ केआँगन की होली के रंग.... गुजिया की खुश्बू के संग

 होली.... मेरे बचपन की....

माँ रंगो की एक थाली बनाती थी। 

कभी कभी घर में रंग नहीं होते थे ,

तो भी माँ को कोई शिकायत नहीं होती थी। 


वो हल्दी निकलती

कुमकुम रखती,

और मुस्कुरा कर कहती---

"यही रंग हैं। ... 

इन्ही से होली  मना लो।"


और हमें सच में वो हल्दी धूप 

जैसे खिली पीले  पीले रंगों सी लगती थी। 

कुमकुम लाल गुलाल सा माँ की ममता जैसा लगता था। 


रंग कम थे, पर माँ की आँखों में पूरी होली चमकती थी। 

पास ही एक दूसरी थाली होती थी----

जिस में गुजिया 

लबालब भरी होती थी।  

गरम खुशबूदार , जैसे माँ के कड़ाई

  से अभी अभी निकली हो,


वो माँ के किचन की गुजिया थी....

जिस का स्वाद आज भी

 किसी हलवाई की दुकान में नहीं मिलता। 


और मज़े की बात ये थी ---

माँ सिर्फ गुजिया बनाना नहीं,

 चोरी करना भी सीखा जाती थी। 

कहती "अभी मत खाना"

और फिर जान बुझ कर 

पीठ फेर लेती। 


हम एक दूसरे को देखते,

आँखों ही आँखों में हसंते ,

और एक गरम गुजिया 

चुपचाप उठा लेते। 


माँ देख भी लेती थी,

 पर डांटती नहीं थी। 

बस हल्की सी मुस्कान

 होठों पर आ जाती थी---

जैसे कह रही हो,

"होली है..

आज शरारत माफ़ है। 


"आज सोचती हू"माँ ने

 हम को रंगो से ज्यादा, खुश रहना सिखाया। 

और गुजिया से ज्यादा पल चुराना। 


श ायद इसलिए आज भी जब  होली आती है। 

तो दिल रंग ढूंढ़ता नहीं,

सीधे माँ के आँगन में चला आता है। 


क्यों कि वहाँ होली 

सब से ज्यादा अपनी लगती थी। 

माँ के आँगन की होली कुछ अलग ही होती थी। 

वह रंग ज्यादा गहरे नहीं होते थे,

पर एहसास बहुत पक्के होते थे। 

 

सुबह की धुप आँगन में ऐसे उतरती थी। 

जैसे हर कोने को चुपचाप 

आशीर्वाद दे रही हो,

माँ तुलसी के पास खड़ी हो,

 कर मुस्कुरा देती थी---

और लगता था , जैसे कह रही हो ......

"आज का दिन अपने -आप अच्छा हो जायेगा "

 होली के रंग हो न हो,

 प्यार के रंगो से भरी ही लगती है। 

"पलकों की नमी माँ की यादों को ऐसे ही सहेज लेती  है "

तो  चलो रंगो को ,गुजिया की खुश्बू से भर 
हम आज अपने बच्चों के लिए ऐसा आँगन तैयार  करे 
ताकि
  हमारे बच्चे  भी  माँ का  आँगन ऐसे ही याद रखें। ..
जैसे हम अपनी माँ का का याद रखते है। 

क्यों सही कहा ना......"होली रे..... .होली" 

"हैप्पी होली".....

सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

इस होली रंग बदले: गुलाल के साथ , रिश्तों में सम्मान और प्यार के रंग

 

होली है....

तो रंग तो होना ही चाहिए। 

पर दोस्तों, इस बार रंगों को

 थोड़ा सा बदल कर देखें।


हरा ,नारंगी, लाल, गुलाल के साथ

क्यों न  

कुछ प्यार भरे शब्दों की होली खेली  जाये। 


क्योकि चेहरों को सुर्ख लाल करना,

 सिर्फ रंगों से ज़रूरी नहीं ,

कभी कभी दो मीठे शब्द भी

 वो रंग चढ़ा जाते है.

जो दिनों तक नहीं उतरता। 


इस होली 

माता पिता के दुलार के रंग हों,

भाई बेहन के विश्वास के रंग हो,

पति-पत्नी के प्यार और सम्मान के रंग हो,

और हर रिश्ते में 

व्यवहार के रंग  भर दिए जाये 


क्योंकि 

रंग अगर रिश्तों में उतर जाएँ 

तो ज़िंदगी खुद त्यौहार बन जाती है। 


होली सिर्फ, शोर, भीड़, और दिखावे का नाम नहीं ,

होली तो वो मौका है,

जब हम अपनी कड़वाहट, शिकायतें 

और मन की गांठें 

धो डालते है। 


इस बार अगर कोई पास नहीं,

तो दूर बैठे किसी अपने को 

बस एक सन्देश भेज दीजिये----

"याद हो....तुम "


यकींन  मानिये,

 वो रंग 

किसी भी गुलाल से ज्यादा 

गहरा होगा। 


होली है.....

तो आओ इस बार 

रंगों की नहीं,

रिश्तों की होली खेलें 

प्यार की होली खेलें 

सम्मान की होली खेलें 


हैप्पी होली। .....

आओ बात करे... के सभी पाठकों को बहुत सम्मान और प्यार से होली की शुभकामनाएं 

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

ख़ामोशी के दर्द----कुछ अपने, कुछ अपनों के ... दिल को छू लेने वाली सच्चाई

CHAPTER-4

 और वो चली गयी......

वो ज्यादा बोलती नहीं थी 

बस सब सुन लेती थी 

घर के शोर में उसकी आवाज़ कभी ऊपर नहीं आयी 

बच्चों की पढ़ाई 

घर की जिम्मेदारियां 

और रिश्तों के बीच वो खुद को कही रख ही नहीं पाई ....


लोग कहते थे वो strong  

पर STRONG का मतलब ये नहीं होता  

कि दर्द महसूस ही न हो...... 

वो रोज़ थक कर भी मुस्कुरातीं रही 

अपनी परेशानियों को बाद में

 देख लेंगे कह कर टालती रही 


किसी ने नहीं पूछा......

उसका दिन केसा गया...... 

किसी ने नहीं देखा 

 कब उसकी आँखों की चमक धीरे धीरे बुझने लगी 


और फिर एक दिन ---

सब कुछ नार्मल। ..

सुबह भी हुई...

 शाम भी आयी 


लेकिन बस एक चीज़ बदल गयी 

वो फिर किसी को नज़र नहीं आयी....

वो चली गयी..( दुनिया से ) 

लोग हैरान थे 

उसने कुछ कहा "क्यों नहीं ?"

किसी को बताया क्यों नहीं 


लेकिन वो बताती किसे। .....सब तो  अपने थे,

वो अपने "क्या सुनते  भी है"?...ये तो उसे पता ही नहीं था 

ये वो अपने थे..... 

जो कुछ बोलने पर खुद ही जज बन जाते थे 


इसलिए जब भी उसने बोला 

 "अरे कभी तो समझा करो"  कहा गया 

जब भी रोई उसे  स्ट्रांग बनो समझाया गया 

 वो दुनिया से नहीं.......

 चुप रहने की आदत से हारी थी 

और उसके जाने के बाद 

घर में सब कुछ था..... पर सुकून नहीं.......


हम एक औरत को उसके फ़र्ज़ हमेशा याद दिलाते रहते हैं 

लेकिन खुद अपनी ड्यूटी जो उस के प्रति वो हम कभी याद भी रखना नहीं चाहते ,

हम किस तरह का समाज बना रहे है 

शायद रिश्ते उतने परिपक्व नहीं रहे ,पर अपने घर के प्रति ,समाज के प्रति ,हमे कुछ तो खुद को जिम्मेदारी लेने के योग्य बनाना होगा ......

कम से कम खुद से तो बात करनी ही होगी। ."तो आओ बात करें "........




  


रविवार, 15 फ़रवरी 2026

मासूम सी ख़्वाहिश ...माँ का आँगन ,और वो नन्ही चिड़िया

 अरे नन्ही चिड़िया,

कभी मेरे  आँगन में भी आया कर। ..

कभी कुछ अपनी सुना , 

कभी मेरी सुन् जाया कर। ....ऐ नन्ही चिड़िया...


 किसी को  फुर्सत नहीं ,

यहाँ बात करने की। .

इसलिए बस नन्हे नन्हे पंखो से..

 आँगन में उतर आया। .....

ऐ नन्ही चिड़िया .........

कभी मेरे आँगन में भी आया कर। ...


कभी धुप की गर्मी,

कभी छाँव की ठंडक 

कभी बारिश की बूंदो से थक कर 

बस मेरे आँगन में बैठ जाया कर .. ..

ऐ नन्ही चिड़िया। ..

कभी मेरे आँगन में भी आया कर ...


फिर हम दोनों फुर्सत से ,

अपनी अपनी कह लेंगे। ..

तू भी ची ची कर  लेना , 

 पल भर  फिर यु ही रह लेंगे।। 

फिर पंखो को फैला कर....

 अपने आसमान में उड़ जाया कर ,

ऐ नन्ही चिड़िया। .. 

कभी मेरे आँगन में भी आया कर....

 ..

उस बचपन के आँगन में...

 तू आज भी उड़ कर  जाती होगी। ..

माँ होती थी जिस आँगन में,

 तू वहाँ  से दाना लाती होगी 

अपने पंखो में छुपा मुझे भी 

माँ के आँगन में घुमाया कर..

.ऐ  नन्ही चिड़िया। ...

कभी मेरे आँगन में भी आया कर....

 

उस घर की सोंधी सी मिटटी
 
आज भी मन को महकती है ,

भाई बहन  के प्यार की खुशबू 
माँ-बापू की याद दिला जाती है 
बस  उनकी यादों को लेकर 
तू प्यार के गीत सुनाया कर 
ऐ नन्ही चिड़िया। ..
कभी मेरे आँगन में भी आया कर
 
अगर ये पंक्तियाँ आप के मन के किसी कोने को छू जाएँ ,
तो समझिये,--- चिड़िया सही आँगन  तक पहुंच गई। 

शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

आओ बात करे :शिवरात्रि और मन के अँधेरे की

 शिवरात्रि पर स्पेशल 

"हे भोले बाबा, मेरे भोले नाथ , 

तीनो लोक में  तू ही तू."..

 जब दुनिया के शोर में मन अपनी आवाज़ खो देता है,

तब शिव का नाम ही है जो हमे वापस खुद से मिलता है। 


शिवरात्रि सिर्फ एक त्यहार नहीं,

ये एक अंतर-यात्रा है---

जहा हम अपनी कमज़ोरी, अपना दर्द, अपनी थकान 

भोले नाथ के चरणों में अर्पण कर  देते है।

जब शिव के साथ माँ पार्वती  होती है तो  भक्ति में शक्ति और शक्ति में 

करुणा जुड़ जाती है 


शिव का अर्थ: विनाश नहीं निर्माण है 

अक्सर लोग शिव को विनाश का देवता  कहते हैं,पर सच ये है,

 शिव विनाश नहीं परिवर्तन  है। 


जो गलत है उसे तोडना ,जो सच है उसे बचाना, 

ये शिव का स्वरुप है :-

शिव:" वो शून्य है जहाँ से सब शुरू होता है.

और वो स्थिरता है जहा सब ठहर जाता है,"


जब जीवन में सब कुछ उलझा हुआ लगता है 

तब शिव हमे सिखाते है -

सब कुछ पकड़ने से नहीं , बल्कि छोड़ने से मिलता है। 

माँ  पार्वती : शक्ति जो संभाल लेती है 


अगर शिव तपस्या है

 तो पार्वती  समर्पण है ,

माँ पार्वती  सिर्फ पत्नी नहीं है 

वो जीवन की साथी शक्ति है 


जब शिव ने विष पिया,

तो माँ   पार्वती दर्द को समझा,

जब शिव शून्य में चले गए 

तो माँ पार्वती  ने संसार को संभाला 


ये ही सच है--

"शक्ति बिना शिव दिशाहीं है और शिव बिना शक्ति अधूरी "

शिव और पार्वती के सम्बन्ध सिर्फ प्रेम के नहीं ,

संतुलन का प्रतीक  हैं 


शिव : वैराग्य 

पार्वती : संसार 

शिव :ध्यान 

पार्वती: जीवन 

शिव :शांति 

पार्वती :साहस 

इसी संतुलन से ही परिवार , समाज और जीवन  चलता है .


आज के जीवन में रिश्तों में जब सिर्फ शर्ते होती जा रही है 

शिव पार्वती हमे याद दिलाते है--

साथ होना मतलब साथ जीना नहीं ,

सब संभालना भी होता है--


शिवरात्रि : रात जो रोशन बन जाये 

शिवरात्रि वो रात है जब अँधेरा भी पूछता है--

"अब मुझे कब ख़तम होना है".?

इस रात हम जागते  नहीं 

हम जागरूक होते है 


अपनी गलतियों को देखते है 

अपनी कमियों को स्वीकार करते है 

और एक नयी शुरआत की प्रतिज्ञा लेते है 


शिवरात्रि का उपवास भूख का नहीं अहंकार का त्याग है 

सब कुछ शिव के चरणों में रख देते है 


आओ  बात करे इस शिवरात्रि उस शिव की जिन का

नाम ही विशेष है  नमः शिवाय का अर्थ

ॐ नमः शिवाय 

ये सिर्फ एक मन्त्र नहीं 

ये एक स्वीकृति है 

का अर्थ है ब्रह्माण्ड 

नमः -में झुकता हूँ 

शिवाय : सच के सामने 

इसका अर्थ है ;-

"मैं अपनी झूटी पहचान छोड़ कर अपने  सच के सामने झुकता हूँ। 


जब मन भारी हो,

जब शब्द कम पड़ जाये तब बस इतना कह देना काफी होता है 

ॐ  नमः शिवाय

आज के जीवन में शिव तत्व 

आज का इंसान बिना मेहनत  के सब कुछ चाहता है 

 जल्दी मिल जाये ,और इस सब में शांति भूल गया है 


शिव हमें सिखाते है 

कम में संतोष 

शून्य में शक्ति 

मौन में उत्तर 


और माँ पार्वती  हमे याद दिलाती है 

जिम्मेदारी से भागना  नहीं, दर्द  को दबाना नहीं

 और प्रेम कमजोरी नहीं ...


शिव शक्ति : दोनों मिलकर जीवन को संतुलित  और सार्थक  बनाते है 

ॐ  नमः शिवाय

ॐ  नमः शिवाय
ॐ  नमः शिवाय........

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

वो चुप थी...ख़ामोशी में छुपी भावनाओं की कहानी


CHAPTER --3

वो चुप थी....

इसलिए नहीं ..

कि उसके पास..

 कहने को कुछ नहीं था,

बल्कि इसलिए 

कि उसने बहुत कुछ कह कर  देख लिया 

उसकी चुप्पी ....


कमजोरी नहीं थी

वो उन जज्बातो का बोझ थी 

जो हर बार 

"सब ठीक है"

कह कर दबा दिए जाते है 


वो औरत थी---

जिसे खुश रहना सिखाया गया ,

पर खुश होना नहीं। 


उसे प्यार मिला,

पर शर्तों के साथ। 

इज्जत मिली,

पर चुप रहने की कीमत पर 

अपनापन मिला पर,

 अपनी पहचान छोड़ने के बाद। 


वो हंसती थी 

ताकि घर का माहौल हल्का रहे 

वो सहती थी। 

ताकि रिश्ते ,

भारी  न हो जाये। 


किसी ने नहीं देखा 

उस ख़ामोशी के पीछे 

कितनी बार,

 उसका दिल टुटा था। 


कितनी बार

 वो बस इतना चाहती थी

 बस कोई पूछ ले ---

"तुम सच में ठीक है ?"


उसकी चुप्पी में 

शिकायते नहीं थी ,

बस उम्मीदें थीं। 

उम्मीद, कि कभी तो 

उसके जज्बात 

बिना बोले समझे जायेंगे। 


वो प्यार चाहती थी---

मुस्कान वाली नहीं,

सुकून वाली। 


पर जब हर बार 

उसकी भावनाओं को 

"ज़्यादा सोचना"

कह कर  ताल दिया गया 


तो उसने बोलना छोड़ दिया। 

कहना छोड़ दिया


और उस दिन जब वो सच में चुप हो गई ,

लोगो ने कहा--

" आज कल वो बदल गयी है"


 हाँ  ...

वो बदल गयी थी 

और वो सब के लिए नहीं,

खुद के लिए जीना सीख रही थी . 


MORAL....

औरत की चुप्पी को 

उसकी सहमति मत समझिये 

कभी कभी 

खामोशी 

सब से ऊँची चीख़ होती है.


 






शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

ख़ामोशी जब जब बोलने लगती है

***CHAPTER--2

आओ बात करे....

उन बातों की,
जो हर रोज़
 होठों तक आ कर ,
फिर भीतर ही कही गिर जाती है।

क्यों कि हर कोई बोलना चाहता है, 
पर सुनना ......
सुनना  किसी को नहीं आता। 

हम ने भी कोशिश की थी,,
समझने की,जताने  की,
खुद को सही ठहराने की ,
पर हर बार शब्द 
किसी दीवार से टकरा कर 
लौट आये। 

तभी हम ने चुप रहना सिख लिया। 
चुप्पी आसान लगती है।
क्यों की उसमें सवाल नहीं होते,
जवाब नहीं देने पड़ते। 
पर ये चुप्पी। ....
 धीरे धीरे बोझ बन जाती है।
 
और एक दिन। .....
 यही ख़ामोशी बोलने लगती है। 

सीने में अजीब-सी  घुटन , 
आँखों में बिना नाम का दर्द,
और दिल में 
बिन बोले शब्दों की भीड़। 

वो लम्हा डरावना होता है ,
जब इंसान 
खुद से भी बात करना छोड़ दे। 

इससे पहले की
ख़ामोशी चिल्लाने लगे ,
इससे पहले
 की अंदर का शोर
हमें  तोड़ दे----

आओ बात करे.. ..बस बात। .....
किसी और से नहीं
बस खुद से। 

बिना शर्म,
बिना डर ,
बिना ये सोचे कि 
कोन  क्या कहेगा। 

बस बात......
दिल की ,
सच की,
और उस इंसान की 
जो अब तक
 सब के लिए मज़बूत बना रहा। 

आओ.... बात करें। .....
क्योकि .... 
कभी कभी बात करना ही इलाज होता है। 

तो  अब आप क्या सोच रहें ?????

करेंगे ना बात। .......




  

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

आओ बात करे... chapter -1 ....खुद को मज़बूत कर के जीवन को संभालना

 CHAPTER --1🍃🌠🌠🌠

आओ बात करे... बस बात...

 

आओ बात करे.....

आज किसी और से नहीं।।।

खुद से। ...


क्युकी अक्सर हम सबसे बातें करते है

 पर अपने भीतर  JO CHAL रहा होता है,

 उसे सुनने का वक़्त नहीं निकलते,....


ज़िन्दगी हमे मजबूत दिखना सीखा देती है 

मुस्कुराते रहना ,

सब संभाल लेना,

और "I AM OK" कह देना।।।। 

ये सब आदत बन जाता है..

पर सच ये है कि 

हर मजबूती के पीछे 

एक थकी हुई AWAAZ  होती है 

जो बस इतना कहना चाहती है..


थोड़ा रुक जाओ। ....

आओ बात करे... बस बात...


उन लम्हो की,

जहा हम टूटे थे ,

पर कह नहीं पाए  

   उन सवालों   की ,

 जिन के जवाब कभी  मिल ही नही  पाए.


और उन ख्वाहिशों की ,

जो "जिम्मेदारियों" के निचे 

कही दब सी गयी


आओ बात करे... बस बात..

तो ..आओ...बात करे......

कभी कभी लगता है

 ज़िन्दगी हम से आगे निकल गयी है 

पर सच ये है की 

हम ही खुद से पीछे छूट गए है ,


आज कोई फैसला नहीं करना। 

आज कुछ साबित नहीं करना 

बस इतना सा सहस काफी है 

कि खुद से आँख मिला कर कह सके--

"मैं यहाँ हूँ"----


अगर आज भी दिल में

 हलकी सी कसक है ,

तो यकीं मानों ---

वो कमजोरी नहीं 

"ज़िंदा होने का साबुत है "


तो चलो ....🌠

आज की बात को यही विराम देते है.....

क्युकी हर गहरी बातचीत 

एक छोटे से वाक्य से शुरू होती है ---


तो ..आओ...बात करे......👥